उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है और इसके साथ ही, सेहत संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं। सोमवार को दिल्ली में भी अनेक जगह पारा 43 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, तो बिहार के गया, कैमूर और बक्सर में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। रोहतास और औरंगाबाद में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया। उधर, झारखंड से तेलंगाना तक बढ़ते तापमान की वजह से स्कूलों का समय बदलना पड़ा है। मौसम विभाग के अनुसार, कहीं-कहीं बारिश का अनुमान है, लेकिन कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में लू का प्रकोप रहेगा। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज का तापमान कहीं-कहीं 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है। वाराणसी, झांसी में भी तापमान 43 से ऊपर दर्ज हुआ है। मौसम विभाग की यही भविष्यवाणी है कि इस सप्ताह तापमान अनेक जगह 45 डिग्री को पार कर जाएगा और उसी के अनुरूप दोपहर के वक्त लू चलने के साथ ही रात में भी गर्मी का आलम रहेगा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने लंबे समय तक भीषण गर्मी के संपर्क में रहने के जोखिमों के बारे में पहले ही कई अलर्ट जारी किए हैं। विशेष रूप से संवेदनशील समूहों या लोगों से सावधानी बरतने का आग्रह किया गया है। वैसे तो गर्मी एक मौसमी असुविधा है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अत्यधिक तापमान के गंभीर या जानलेवा परिणाम हो सकते हैं। गर्मी की शुरुआत में ही यह ध्यान कर लेना चाहिए कि लू का मानव शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे हृदय, गुर्दे, मस्तिष्क पर ज्यादा असर पड़ता है। तीव्र तापमान के समय घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए और अगर घर से निकलना जरूरी हो, तो बचाव के इंतजाम साथ में रखने चाहिए। लगे हाथ, गर्मी के मौसम में पर्यावरण और जल संरक्षण के प्रति भी सजग रहना चाहिए। यह जल के सदुपयोग का समय है। दुनिया में भारत के हिस्से केवल चार प्रतिशत शुद्ध जल आया है, जबकि यहां विश्व के 16 प्रतिशत से भी ज्यादा लोग रहते हैं। देश में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता में बीते दो दशक में 20 प्रतिशत की कमी आई है। आमतौर पर यह देखा गया है कि गर्मी के बढ़ते ही जल संकट मंडराने लगता है, अत: जल विभाग के लिए भी यह अतिरिक्त सावधानी का समय है।
अभी यह एक बड़ा सवाल है कि क्या भारत में मौसम जनित संकट में लगातार वृद्धि हो रही है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के सलाटा इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट ऐंड सस्टेनेबिलिटी द्वारा प्रकाशित शोध पत्र से यह पता चलता है कि जलवायु संकट की वजह से भारत में भीषण गर्मी का सबसे बुरा दौर आना बाकी है। साल 1980-90 और 2015-24 के बीच भारत की भूमि का तापमान 0.88 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। इसके लिए वायु प्रदूषण को भी जिम्मेदार माना गया है। निकट भविष्य में तापमान का दायरा और तीव्र होने वाला है। देश में करीब दो करोड़ लोग 2030 तक बहुत घातक गर्म हालात का सामना कर रहे होंगे। इसका असर रोजगार पर भी पड़ेगा। यह ध्यान देने की बात है कि भारत में करीब आठ प्रतिशत घरों में ही वातानुकूलन की सुविधा है। एक चिंता की बात यह है कि गर्मी बढ़ेगी, तो बारिश में भी इस सदी के अंत तक 20 प्रतिशत की बढ़त हो जाएगी। इसका कृषि उपज पर भयानक असर पड़ेगा। अत: इस बढ़ते तापमान और बिगड़ते पर्यावरण के साथ हमारी सजगता का बढ़ना भी जरूरी है, ताकि हमारे पास बचाव के पूरे इंतजाम हों और हमें मौसम की प्रतिकूलता की वजह से कम से कम नुकसान उठाना पड़े।
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