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ग्रीक समुद्री रिस्क मैनेजमेंट फर्म MARISKS ने सोमवार को एक सीरियस अलर्ट जारी किया. फर्म ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में फंसे जहाजों और शिपिंग कंपनियों को फर्जी मैसेज भेजे जा रहे हैं. इन संदेशों में खुद को ईरानी अधिकारी बताते हुए सुरक्षित रास्ता देने के बदले बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में पेमेंट की मांग की जा रही है.
सुरक्षा फर्म ने बताया है कि इस तरह के मैसेज पूरी तरह से स्कैम हैं और इनका ईरानी अधिकारियों से कोई लेना-देना नहीं है. फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में सैकड़ों जहाज और करीब 20 हजार नाविक फंसे हुए हैं.
गौर करने वाली बात है कि ईरान ने सीजफायर वार्ताओं के बीच सुरक्षित आवाजाही के लिए जहाजों पर टोल लगाने का प्रस्ताव दिया था, जिसका फायदा अब जालसाज उठा रहे हैं. इस मामले पर तेहरान की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है.
फायरिंग का शिकार जहाज
MARISKS के मुताबिक, कम से कम एक जहाज, जिसने शनिवार को होर्मुज स्ट्रेट से बाहर निकलने की कोशिश की थी और उस पर गोलीबारी हुई थी, इस धोखाधड़ी का शिकार माना जा रहा है. 18 अप्रैल को जब ईरान ने जांच के दौरान जलमार्ग को थोड़े वक्त के लिए खोला था, तब कई जहाजों ने वहां से गुजरने की कोशिश की. इनमें से एक टैंकर सहित करीब दो जहाजों ने रिपोर्ट दी कि ईरानी नावों ने उन पर गोलियां चलाईं, जिससे उन्हें मजबूरन वापस मुड़ना पड़ा.
अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बार-बार बंद करने से ग्लोबल ऑयल और नेचुरल गैस की आपूर्ति ठप है. जंग से पहले दुनिया का पांचवां हिस्सा ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते से होती थी. इसी अनिश्चितता का फायदा उठाकर साइबर अपराधी शिपिंग कंपनियों को ‘क्लीयरेंस’ के नाम पर चूना लगा रहे हैं. MARISKS ने सभी शिप मालिकों को सलाह दी है कि वे ऐसे किसी भी अज्ञात भुगतान अनुरोध पर भरोसा न करें.
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होर्मुज जलमार्ग पर कंट्रोल रखने वाले तेहरान और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के बीच खींचतान का खामियाजा समुद्र में फंसे हजारों नाविकों को भुगतना पड़ रहा है. जहाजों के फंसे होने से जहां एक तरफ लॉजिस्टिक लागत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे स्कैम संदेशों ने शिपिंग कंपनियों की चिंता और बढ़ा दी है. सुरक्षा एजेंसियां अब इन फर्जी मैसेजों के सोर्स की जांच कर रही हैं, जिससे आने वाले वक्त में इस तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके.
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