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जर्मनी दौरे पर पहुंचे भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वेस्ट एशिया में जारी हालात को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जो भी रुकावटें हो रही हैं, वो भारत के लिए कोई दूर की घटना नहीं, बल्कि सीधा असर डालने वाली हकीकत हैं.
जर्मन संसद की रक्षा और सुरक्षा समिति को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “एक विकासशील देश के रूप में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वेस्ट एशिया पर काफी निर्भर है. ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट में रुकावटें हमारे लिए दूर की बात नहीं हैं, बल्कि हमारी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधा असर डालती हैं.”
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राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि आज दुनिया नए तरह के सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है. उन्होंने कहा, “तकनीक में तेजी से बदलाव के कारण हालात पहले से ज्यादा जुड़े हुए और चुनौतीपूर्ण हो गए हैं. ऐसे में बदलते माहौल के मुताबिक खुद को ढालने की जरूरत है.”
राजनाथ सिंह ने भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा, “आज के दौर की चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित जवाब और भरोसेमंद साझेदारी बेहद जरूरी है.” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देश इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं.
रक्षा मंत्री ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर भी बात की. उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भर भारत सिर्फ खरीद का प्रोग्राम नहीं है, बल्कि साथ मिलकर बनाने, विकसित करने और नए इनोवेशन करने का मौका है.” उन्होंने जर्मनी की इंडस्ट्री और वहां के छोटे-मध्यम उद्योगों की तारीफ करते हुए कहा कि भारत और जर्मनी इस क्षेत्र में एक-दूसरे को मजबूती दे सकते हैं.
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राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि आज के हालात को सिर्फ क्षेत्रीय नजरिए से नहीं देखा जा सकता. उन्होंने कहा, “इसके असर ग्लोबल हैं. ये सिर्फ लोकल समस्या नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डालने वाले घटनाक्रम हैं.”
आसान भाषा में कहें तो भारत ने साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट में कोई भी हलचल सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है. इसका असर सीधे भारत जैसे देशों पर पड़ता है, और यही वजह है कि भारत इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से देख रहा है.
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