Census India 2027: सरकार घर-घर जाकर 33 सवालों से जुटाएगी विस्तृत जानकारी, बनेगा विकास का नया खाका – Jagran

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Dhanbad Census 2027: झारखंड सरकार ने जनगणना 2027 की तैयारी तेज कर दी है, जिसमें 33 विस्तृत सवालों के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर और बुनियादी सुविधाओं …और पढ़ें
घर-घर जाकर जानकारी जुटाते जनगणनाकर्मी। (प्रतीकात्मक फोटो)
जागरण संवाददाता, धनबाद। झारखंड सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा 17 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार आगामी जनगणना 2027 को लेकर तैयारी तेज कर दी गई है। इस बार जनगणना पहले से कहीं अधिक विस्तृत और आधुनिक होगी।
भारत सरकार की ओर से कुल 33 सवालों का एक प्रारूप तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से लोगों के जीवन स्तर, सुविधाओं और बुनियादी जरूरतों की सटीक तस्वीर सामने लाई जाएगी। जनगणना कर्मी अब केवल जनसंख्या की गणना तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि घर-घर जाकर लोगों के रहन-सहन, आवासीय स्थिति और दैनिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी जुटाएंगे।
इसमें भवन संख्या, मकान का प्रकार, दीवार, छत और फर्श में प्रयुक्त सामग्री, मकान की स्थिति और उसके उपयोग से जुड़े प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा परिवार से जुड़े सवालों में परिवार के सदस्यों की संख्या, परिवार प्रमुख का नाम, लिंग और सामाजिक वर्ग (अनुसूचित जाति/जनजाति आदि) की जानकारी भी ली जाएगी। मकान के स्वामित्व, उपलब्ध कमरों की संख्या और परिवार में विवाहित दंपतियों की संख्या जैसे पहलुओं को भी दर्ज किया जाएगा।
जिला सांख्यिकी पदाधिकारी उमेश लोहरा ने बताया कि इस बार जनगणना में लोगों की बुनियादी सुविधाओं पर विशेष फोकस रखा गया है। पेयजल का मुख्य स्रोत क्या है, पानी की उपलब्धता कैसी है, घर में शौचालय है या नहीं, उसका प्रकार क्या है, गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था कैसी है और स्नानघर की उपलब्धता जैसे सवाल पूछे जाएंगे।
साथ ही रसोईघर की स्थिति, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता और खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले मुख्य ईंधन की जानकारी भी जुटाई जाएगी। इसके अलावा घर में प्रकाश का मुख्य स्रोत क्या है, रेडियो/ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट सुविधा, साइकिल, मोटरसाइकिल या अन्य संसाधनों की उपलब्धता जैसी जानकारियां भी दर्ज होंगी।
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जिला सांख्यिकी अधिकारी के अनुसार इन 33 सवालों के जरिए सरकार को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का विस्तृत डेटा मिलेगा। इससे यह पता चल सकेगा कि किन क्षेत्रों में अब भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है और किन योजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सरकार का मानना है कि इस बार की जनगणना केवल जनसंख्या गिनने का कार्य नहीं, बल्कि विकास की नई रूपरेखा तैयार करने का आधार बनेगी। जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर आवास, स्वच्छता, पेयजल, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ी योजनाओं को और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।

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