गुरुग्राम में अब घर-घर से कूड़ा उठेगा, हर गली-मोहल्ले तक 700 नए वाहनों का बेड़ा तैनात किया जाएगा – Live Hindustan

मिलेनियम सिटी गुरुग्राम के लाखों निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। शहर में पिछले करीब दो वर्षों से चरमराई कूड़ा उठान व्यवस्था अब जल्द ही पटरी पर लौटने वाली है। नगर निगम गुरुग्राम द्वारा घर-घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था को पूरी तरह से सुदृढ़ करने के लिए भेजे गए 607 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को राज्य सरकार ने अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है।
नगर निगम अधिकारियों ने इसी महीने के पहले सप्ताह में यह प्रस्ताव सरकार को भेजा था। इस बड़े फैसले के बाद शहर में कचरा प्रबंधन को लेकर चल रही भारी अव्यवस्था के जल्द खत्म होने की पूरी उम्मीद जग गई है और अब कूड़े को लेकर होने वाली परेशानियां कुछ ही दिनों में दूर हो जाएंगी। नई टेंडर प्रक्रिया के तहत कचरा संग्रहण प्रणाली को पूरी तरह से आधुनिक और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। शहर के हर कोने, हर गली और मोहल्ले तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 700 नए वाहनों का एक बड़ा बेड़ा तैनात किया जाएगा। पिछले काफी समय से सौ फीसदी घरों से कूड़ा नहीं उठ पा रहा था।
गुरुग्राम नगर निगम के आयुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि निगम की तरफ से भेजे गए नए आरएफपी को मुख्यालय से अनुमति मिल गई है। इसको लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही लोगों को कूड़े की समस्या से स्थायी समाधान मिलेगा।
पिछले दो वर्षों से गुरुग्राम में डोर-टू-डोर (घर-घर) कूड़ा उठाने की व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी थी। ठेकेदारों की कमी और जरूरी संसाधनों के भारी अभाव में नगर निगम शहर के सभी घरों तक पहुंचने में लगातार संघर्ष कर रहा था। इस भारी अव्यवस्था का सीधा और नकारात्मक असर शहर की स्वच्छता पर पड़ा। शहर के प्रमुख रिहायशी इलाकों, कॉलोनियों और मुख्य सड़कों के किनारे कूड़े के बड़े-बड़े पहाड़ लग गए थे। गंदगी के कारण बदबू और बीमारियों का खतरा भी बना हुआ था।
इस बार नए टेंडर में ठेका लेने वाली कंपनियों की शर्तों में भी बदलाव किए गए हैं। पहले के सख्त नियमों में यह शर्त थी कि टेंडर भरने वाली कंपनी के पास पिछले सात वित्तीय वर्षों (2018-2025) में किसी महानगर में कूड़ा उठाने-निस्तारण का अनुभव होना अनिवार्य है। नए नियम के तहत अब वे एजेंसियां भी योग्य मानी जाएंगी, जिनके पास सात सालों में किसी भी निगम क्षेत्र में यह काम करने का अनुभव होगा।
शहर में कूड़ा प्रबंधन का यह संकट जून 2024 में शुरू हुआ था, जब खराब प्रदर्शन के कारण तत्कालीन इको ग्रीन कंपनी का ठेका रद्द कर दिया गया था। एक साल के लिए लाई गई रिप्लेसमेंट एजेंसी भी पूरी तरह फेल साबित हुई। घरों से कूड़ा उठाने का पहला नया टेंडर 12 जुलाई 2024 को निकाला गया। लेकिन तब से अब तक टेंडर की शर्तों (आरएफपी) को छह बार बदला जा चुका है।
सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के ‘डीडी न्यूज’ से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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