विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर बिजनौर के स्योहारा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शनिवार को जागरूकता और संकल्प का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने वर्ष 2030 तक भारत को मलेरिया मुक्त बनाने का संकल्प लिया। इस दौरान मलेरिया से बचाव, समय पर जांच और उपचार के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।
मलेरिया उन्मूलन का लिया संकल्प
सीएचसी स्योहारा के केंद्र अधीक्षक डॉ. बी.के. स्नेही के नेतृत्व में समस्त चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने शपथ ग्रहण की। सभी ने मिलकर वर्ष 2030 तक मलेरिया उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने का संकल्प लिया।
जागरूकता अभियान पर जोर
डॉ. स्नेही ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार मलेरिया के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक देश को मलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है।
गर्मी में बढ़ता है मलेरिया का खतरा
उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने से मलेरिया का खतरा अधिक हो जाता है। यदि समय पर उपचार न मिले तो यह बीमारी गंभीर और जानलेवा भी साबित हो सकती है।
पहचानें मलेरिया के लक्षण
मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में ठंड लगना, कंपकंपी के साथ तेज बुखार, सिरदर्द तथा पसीना आकर बुखार उतरना शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
जांच और उपचार पूरी तरह निःशुल्क
सरकारी अस्पतालों में मलेरिया की जांच और उपचार पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध है। संदिग्ध मरीजों की ब्लड स्लाइड बनाकर जांच की जाएगी, जिससे संक्रमण की पुष्टि कर तुरंत इलाज शुरू किया जा सके।
स्वच्छता ही सबसे बड़ा बचाव
स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने देने, साफ-सफाई बनाए रखने और बुखार होने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में जांच कराने की अपील की। इस वर्ष विश्व मलेरिया दिवस की थीम है- “मलेरिया खत्म करने की ओर, अब हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा।”
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