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Dhundhiraj Chaturthi 2026 Date: हिन्दू धर्म में हर माह में दो चतुर्थी आती हैं, जिसमें फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ‘ढुण्ढ़िराज चतुर्थी’ कहा जाता है. इस मास की शुक्ल चतुर्थी को लेकर भक्तों और लोगों के बीच इस बार खास उत्सुकता है. तिथि 20 और 21 फरवरी को पड़ने के कारण लोगों के मन मे सवाल उठ रहा है कि ढुण्ढ़िराज चतुर्थी का व्रत आखिर किस दिन रखा जाए. भगवान गणेश की आराधना के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस व्रत से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधा दूर होती है और रुके काम पूरे होते है. शनिवार का संयोग इस बार इस पर्व को और भी खास बना रहा है. आइए जानते है 2026 मे ढुण्ढ़िराज चतुर्थी की सही तारीख, पूजा का उत्तम समय और चंद्र दर्शन का सटीक समय, ताकि बिना किसी भ्रम के पूरे विधि विधान से व्रत और पूजा किया जा सके.
2026 में फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी तिथि 20 फरवरी, शुक्रवार को दोपहर 02:38 बजे से प्रारंभ होकर 21 फरवरी, शनिवार को दोपहर 01:00 बजे तक रहेगी. पंडितों के अनुसार व्रत उसी दिन रखा जाता है जब सुबह सूर्योदय के समय चतुर्थी तिथि मौजूद हो. इस बार 21 फरवरी, शनिवार सुबह चतुर्थी रहेगा, इसलिए ढुण्ढ़िराज चतुर्थी का व्रत 21 फरवरी, शनिवार को ही रखा जाएगा.
शनिवार का दिन होने से इस बार शनि देव की भी कृपा का योग बन रहा है. पूजा और व्रत के लिए कुछ मुख्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
प्रातः शुभ समय: 08:24 से 09:49 बजे तक
मध्यान्ह प्रमुख समय: 12:40 से 2:05 बजे तक
सायंकाल काल: 3:31 से 4:56 बजे तक
इन समयों में के अलावा चंद्रोदय काल में भगवान गणेश की पूजा करने से अधिक फलदायी फल की मान्यता है.
यह भी पढ़ें: Planet Alignment: 6 ग्रहों की परेड से फरवरी के अंतिम हफ्ते में खुलेगी इन 6 राशियों की किस्मत, मिलेगी मनचाही सफलता
चतुर्थी पर चंद्र भगवान की पूजा का विशेष महत्व होता है. 21 फरवरी 2026 की रात्रि लगभग 20:56 बजे चंद्रमा उदित होगा. शहरों के समय में 5–10 मिनट का अन्तर संभव है. यदि बादलों के कारण चांद न दिखे, तो चंद्रमा की दिशा में मुख कर मानसिक पूजा कर सकते हैं.
संकल्प करें: सुबह जल्दी उठकर शुद्ध स्नान के बाद व्रत हेतु संकल्प लें.
स्थापना करें: लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा रखें.
श्रृंगार: गणेश जी को सिंदूर तिलक लगाकर दूर्वा अर्पित करें.
भोग: मोदक या लड्डू का भोग चढ़ाएं, ध्यान रहे तुलसी का प्रयोग न करें.
मंत्र जाप: ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप लगातार करते रहें.
‘ढुण्ढ़ि’ शब्द का अर्थ है खोजना. पुराणों में वर्णित है कि श्री गणेश ने कठिन से कठिन कष्ट भी ढूंढ़ कर उसके निवारण में सहायता की थी. इसी कारण इन्हें ढुण्ढ़िराज कहा जाता है. काशी (वाराणसी) में ढुण्ढ़िराज गणेश का प्राचीन मंदिर है जहां इस उत्सव का विशेष आयोजन होता है. ढुण्ढ़िराज चतुर्थी व्रत रखने के लाभ इस प्रकार हैं:
– कठिन बाधाओं का समाधान होता है.
– घर में शांति और समृद्धि आती है.
– अटके कार्यों में सफलता मिलती है.
– भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
यह भी पढ़ें: Gems Wearing Rules: मोती के संग भूलकर भी न पहनें ये 5 रत्न, जीवन में बढ़ जाएगा अनचाहा तनाव
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Dhundhiraj Chaturthi 2026 Date: हिन्दू धर्म में हर माह में दो चतुर्थी आती हैं, जिसमें फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ‘ढुण्ढ़िराज चतुर्थी’ कहा जाता है. इस मास की शुक्ल चतुर्थी को लेकर भक्तों और लोगों के बीच इस बार खास उत्सुकता है. तिथि 20 और 21 फरवरी को पड़ने के कारण लोगों के मन मे सवाल उठ रहा है कि ढुण्ढ़िराज चतुर्थी का व्रत आखिर किस दिन रखा जाए. भगवान गणेश की आराधना के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस व्रत से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधा दूर होती है और रुके काम पूरे होते है. शनिवार का संयोग इस बार इस पर्व को और भी खास बना रहा है. आइए जानते है 2026 मे ढुण्ढ़िराज चतुर्थी की सही तारीख, पूजा का उत्तम समय और चंद्र दर्शन का सटीक समय, ताकि बिना किसी भ्रम के पूरे विधि विधान से व्रत और पूजा किया जा सके.
2026 में फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी तिथि 20 फरवरी, शुक्रवार को दोपहर 02:38 बजे से प्रारंभ होकर 21 फरवरी, शनिवार को दोपहर 01:00 बजे तक रहेगी. पंडितों के अनुसार व्रत उसी दिन रखा जाता है जब सुबह सूर्योदय के समय चतुर्थी तिथि मौजूद हो. इस बार 21 फरवरी, शनिवार सुबह चतुर्थी रहेगा, इसलिए ढुण्ढ़िराज चतुर्थी का व्रत 21 फरवरी, शनिवार को ही रखा जाएगा.
शनिवार का दिन होने से इस बार शनि देव की भी कृपा का योग बन रहा है. पूजा और व्रत के लिए कुछ मुख्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
प्रातः शुभ समय: 08:24 से 09:49 बजे तक
मध्यान्ह प्रमुख समय: 12:40 से 2:05 बजे तक
सायंकाल काल: 3:31 से 4:56 बजे तक
इन समयों में के अलावा चंद्रोदय काल में भगवान गणेश की पूजा करने से अधिक फलदायी फल की मान्यता है.
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चतुर्थी पर चंद्र भगवान की पूजा का विशेष महत्व होता है. 21 फरवरी 2026 की रात्रि लगभग 20:56 बजे चंद्रमा उदित होगा. शहरों के समय में 5–10 मिनट का अन्तर संभव है. यदि बादलों के कारण चांद न दिखे, तो चंद्रमा की दिशा में मुख कर मानसिक पूजा कर सकते हैं.
संकल्प करें: सुबह जल्दी उठकर शुद्ध स्नान के बाद व्रत हेतु संकल्प लें.
स्थापना करें: लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा रखें.
श्रृंगार: गणेश जी को सिंदूर तिलक लगाकर दूर्वा अर्पित करें.
भोग: मोदक या लड्डू का भोग चढ़ाएं, ध्यान रहे तुलसी का प्रयोग न करें.
मंत्र जाप: ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप लगातार करते रहें.
‘ढुण्ढ़ि’ शब्द का अर्थ है खोजना. पुराणों में वर्णित है कि श्री गणेश ने कठिन से कठिन कष्ट भी ढूंढ़ कर उसके निवारण में सहायता की थी. इसी कारण इन्हें ढुण्ढ़िराज कहा जाता है. काशी (वाराणसी) में ढुण्ढ़िराज गणेश का प्राचीन मंदिर है जहां इस उत्सव का विशेष आयोजन होता है. ढुण्ढ़िराज चतुर्थी व्रत रखने के लाभ इस प्रकार हैं:
– कठिन बाधाओं का समाधान होता है.
– घर में शांति और समृद्धि आती है.
– अटके कार्यों में सफलता मिलती है.
– भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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