ऐप से 45000, ऑफलाइन में सिर्फ 12 हजार की कमाई; नोएडा की हाउस हेल्प ने बताई कड़वी सच्चाई – Live Hindustan

इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ ही देश में गिग प्लेटफॉर्म और ऐप बेस्ड सर्विसेज की बाढ़ आ गई है। मेकअप से लेकर कुकिंग तक, आज इंटरनेट पर हर तरह की सर्विसेज आसानी से उपलब्ध है और लोग मिनटों में ऑनलाइन बुकिंग कर इनका फायदा उठा सकते हैं। हालांकि लोगों को इन ऐप्स ने जितनी सहूलियत दी है, कुछ लोगों के लिए ये उतनी ही मुसीबत लेकर आई है। इन लोगों में से एक हैं वैसी महिलाओं जो सालों से हाउस हेल्प यानी लोगों को घरों में खाना बनाने या साफ सफाई में मदद करने का काम कर रही हैं।
ऐप बेस्ड सर्विसेज की इस आंधी में पारंपरिक घरेलू कामगारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े कामगारों के बीच का फर्क साफ नजर आने लगा है। मोहल्लों में काम करने वाली कई महिलाओं के लिए आज भी कम कमाई, बढ़ती महंगाई और डिजिटल दुनिया से दूरी रोजमर्रा की सच्चाई है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए उतना ही काम कर कुछ महिलाएं ज्यादा पैसा कमा रही हैं लेकिन कुछ का जीवन अब भी वहीं अटका हुआ है।
नोएडा की एक हाउस हेल्प जो पिछले 6-7 साल से कई घरों में काम कर रही है, बताती हैं कि उनके लिए गुजारा करना ही मुश्किल है। तय सैलरी न होने की वजह से हर घर से अलग-अलग पैसे मिलते हैं, कहीं 1500 रुपये, कहीं 2000 या 2500, और कुछ घरों में ज्यादा से ज्यादा 3000 रुपये। रोज 3-4 घरों में काम करने के बावजूद वह महीने में सिर्फ 12 से 15 हजार रुपये ही कमा पाती हैं। इसी कमाई से उसे खाना, किराया, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और बाकी खर्च पूरे करने पड़ते हैं। बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं और बीमारी के समय अक्सर उधार लेना पड़ता है। वह बताती है कि लगातार पैसों की तंगी में ही जिंदगी गुजर रही है और यह हाल सिर्फ उनका नहीं, बल्कि देश के असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली कई महिलाओं का है।
ऑफलाइन काम करने वाली कई महिलाओं के लिए दिक्कत सिर्फ कम पैसे की नहीं है, बल्कि डिजिटल दुनिया से कटे होने की भी है। पढ़ाई कम होने और मोबाइल ठीक से न चला पाने की वजह से वे उन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच ही नहीं बना पातीं, जहां अब घरेलू काम के मौके मिल रहे हैं। वह कहती हैं, “हम ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं और मोबाइल चलाना भी नहीं आता, इसलिए ऑनलाइन काम नहीं मिल पाता।” उनके मुताबिक, इसी वजह से एक ही काम में दो अलग-अलग दुनिया बन गई हैं, एक जो जैसे-तैसे गुजारा कर रही है और दूसरी जो टेक्नोलॉजी से फायदा उठा रही है।
उनके मुताबिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ी महिलाएं पारंपरिक कामगारों से काफी ज्यादा कमा रही हैं। वह कहती हैं “अगर कोई ऑनलाइन काम करता है तो उसे घंटे के हिसाब से 100 से 200 रुपये मिलते हैं, और जितने घंटे काम, उतने पैसे।” इस तरह जहां ऑफलाइन काम करने वाली महिलाएं 12 से 15 हजार रुपये महीना ही कमा पाती हैं, वहीं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ी महिलाएं 40 से 45 हजार रुपये तक कमा लेती हैं। वह कहती हैं, “तुलना करें तो हम 12-15 हजार ही कमा पाते हैं, लेकिन ऑनलाइन काम करने वाली मेड इससे कहीं ज्यादा कमा रही हैं।” उन्हें इसीलिए निराशा है क्योंकि उनकी खुद की कमाई में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।
जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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