पहले पैसे वापस लिए, अब पाकिस्तान से बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी में UAE की दिग्गज कंपनी – Live Hindustan

हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान को एक बड़ा झटका देते हुए अपना 3.5 अरब डॉलर का कर्ज वापस ले लिया था। अब पाकिस्तान के लिए एक और बड़ी आर्थिक चुनौती सामने आ रही है। UAE की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी ईएंड (e&) पाकिस्तान के टेलीकॉम सेक्टर से पूरी तरह से बाहर निकलने पर विचार कर रही है। ईएंड को पहले एतिसलात (Etisalat) के नाम से जाना जाता था। आइए पूरा मामला समझते हैं।
e& (एतिसलात) के पास पाकिस्तान की सरकारी टेलीकॉम कंपनी PTCL (पाकिस्तान दूरसंचार कंपनी लिमिटेड) की 26% हिस्सेदारी है। सिर्फ हिस्सेदारी ही नहीं, बल्कि कंपनी का मैनेजमेंट कंट्रोल भी इसी खाड़ी कंपनी के हाथों में है। अब कंपनी अपनी निवेश रणनीति की समीक्षा कर रही है और PTCL से अपने शेयर बेचकर बाहर निकलने की तैयारी के शुरुआती चरण में है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई की कंपनी का यह कदम केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। दरअसल, खाड़ी देशों के निवेशक कई वैश्विक बाजारों में अपने निवेश और संपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस समीक्षा के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हैं:
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में उतार-चढ़ाव।
क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव: मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में चल रहे राजनीतिक और रणनीतिक टकराव।
पूंजी आवंटन की नई नीतियां: सरकारी या सॉवरेन फंड से जुड़े निवेशकों द्वारा अपनी पूंजी को अधिक सुरक्षित और लाभदायक जगहों पर लगाने की बदलती रणनीति।
यह खबर ऐसे समय में आई है जब हाल ही में पाकिस्तान को UAE का 3.5 अरब डॉलर का भारी-भरकम कर्ज चुकाना पड़ा है। यह वह कर्ज था जिसे UAE पिछले कई सालों से रोल-ओवर यानी चुकाने की मोहलत लगातार बढ़ाता रहा था, ताकि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार दिवालिया होने से बचा रहे। लेकिन UAE द्वारा अचानक इस पैसे की मांग करने पर, कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान को यह रकम लौटानी पड़ी।
पाकिस्तान सरकार और एतिसलात के बीच 2005 से एक बड़ा वित्तीय विवाद चल रहा है। साल 2005 में एतिसलात ने PTCL की 26% हिस्सेदारी 2.6 अरब डॉलर में खरीदी थी। कंपनी ने 1.8 अरब डॉलर का भुगतान तो कर दिया था, लेकिन बाकी के 800 मिलियन डॉलर (लगभग 6.6 खरब पाकिस्तानी रुपये) यह कहकर रोक लिए थे कि पाकिस्तान सरकार समझौते के मुताबिक PTCL की कुछ संपत्तियों को कंपनी के नाम पर ट्रांसफर करने में विफल रही है। यह 800 मिलियन डॉलर का विवाद 20 सालों से अनसुलझा है और पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के बावजूद एतिसलात ने यह पैसा नहीं दिया।
राजनयिक और वित्तीय सूत्रों के मुताबिक, यह कदम सिर्फ पाकिस्तान की खराब अर्थव्यवस्था के कारण नहीं उठाया जा रहा है, बल्कि इसके पीछे UAE की अपनी एक नई ग्लोबल रणनीति है। UAE अब अपने आर्थिक फैसलों में बेहद आक्रामक नीति अपना रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि उसने हाल ही में दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों के समूह ‘OPEC’ से भी बाहर निकलने का फैसला किया है। इसी ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ के तहत वह पाकिस्तान के टेलीकॉम सेक्टर से भी अपना हाथ खींच रहा है।
UAE जैसे अहम सहयोगी और सबसे बड़े निवेशकों में से एक का पीछे हटना पाकिस्तान की पहले से खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के लिए किसी झटके से कम नहीं है। PTCL पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से एक बेहद महत्वपूर्ण संस्था है। हालांकि, पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का दावा है कि अगर UAE अपना निवेश निकालता है, तो वे खाली हुई जगह पर सऊदी अरब और कतर जैसे अन्य खाड़ी देशों से नया निवेश आकर्षित करने की कोशिश करेंगे।
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