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सुबह का शांत माहौल है. हजारों लोग एक के पीछे एक बैठे हैं. लोगों की ऐसी मौजूदगी के बावजूद शांति बरकरार है. फिर जैसे ही मंच से कोई मंत्र और निर्देश सुनाई देता है, अपनी-अपनी दरियों पर बैठे लोग लोग उसका पालन करने लगते हैं. कभी सभी हाथ एक-साथ ऊपर जाते हैं, कभी आजू-बाजू तो अगले निर्देश पर धीरे-धीरे एक साथ नीचे आ जाते हैं.
सांस भीतर लीजिए, सांस बाहर छोड़िये, रोकिए, धीरे-धीरे फिर लीजिए… हर एक निर्देश के साथ एक जैसे काम. जैसे कि कोई नदी बह रही हो और उसकी धाराएं लहर पैदा करती हुई आगे बढ़ रही हों. वाकई योग एक नदी ही तो है, जिसकी धारा में जो भी आता है, उसके तन और मन के सभी विकार, सभी दोष धीरे-धीरे इस नदी में घुल जाते हैं, बह जाते हैं और फिर बचता है निर्मल शरीर जो अध्यात्म की राह पर आगे बढ़ने के लिए तैयार होता है.
त्यागराज स्पोर्ट्स स्टेडियम में आध्यात्मिक चेतना का जागरण
योग की इसी धारा का साक्षी बन रहा है त्यागराज स्पोर्ट्स स्टेडिम, जहां राजधानी दिल्ली के लोग आध्यात्मिक चेतना और मानसिक-शारीरिक विकास के अद्भुत संगम में ‘योग-स्नान’ कर रहे हैं. यह तीन दिवसीय योग साधना सत्र 1 मई से जारी है और 3 मई तक इसका लाभ लिया जा सकता है. पद्म भूषण स्वामी निरंजनानंद सरस्वतीजी की मौजूदगी इसे और खास बना देती है. स्वामीजी बिहार योग विद्यालय के आध्यात्मिक प्रमुख हैं और योग की पारंपरिक धारा को सरल और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने के लिए विश्वभर में सम्मान के साथ पहचाने जाते हैं.
जीवन को शांत और संतुलित करता है योग
यह आयोजन केवल एक योग शिविर नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के दो महत्वपूर्ण पड़ावों का उत्सव भी है. पहला, सद्गुरु श्रीस्वामी शिवानंद सरस्वती जी के संन्यास के 100 वर्ष (1924-2024) पूरे होने का अवसर, और दूसरा, पूज्य श्री स्वामी सत्यानंद सरस्वती जी की जन्म शताब्दी (1923-2024). इन दोनों महान संतों ने योग के गहरे और व्यापक स्वरूप को फिर से जीवित किया और उसे पूरी दुनिया तक पहुंचाया. उनकी शिक्षाओं ने यह स्पष्ट किया कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का जरिया नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित, शांत और जागरूक बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया है.
योग के असल स्वरूप से पहचान कराने की कवायद
इस कार्यक्रम के आयोजकों का कहना है कि, ‘आज के समय में योग का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. कई जगहों पर इसे केवल एक प्रोफेशनल, बिजनेस एक्टिविटी की तरह समझ लिया गया है. जिससे इसकी मूल भावना और शुद्धता प्रभावित हो रही है. योग का असली उद्देश्य, जो आत्म-विकास और आत्म-साक्षात्कार से जुड़ा है, धीरे-धीरे समाज से दूर होता जा रहा है.
ऐसे समय में ‘भारत योग यात्रा’ एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है, जो लोगों को योग के असल वास्तविक स्वरूप से जोड़ने का प्रयास कर रही है. सत्यानंद योग परंपरा ने दुनिया भर में योग की पारंपरिक समझ को फिर से जगाया है और लोगों को यह सिखाया है कि योग केवल सीखने या किसी शारीरिक आसन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह जीने की प्रक्रिया है.
सरल भाषा और सहज तरीके से योग अभ्यास की समझ
स्वामी निरंजनानंद सरस्वती जी इस यात्रा के जरिये ‘सत्यम योग प्रसाद’ को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं. उनके मार्गदर्शन में साधक प्रामाणिक योग तकनीकों का अभ्यास कर रहे हैं, जिससे वे अपने भीतर बदलाव और आध्यात्मिक जागृति का अनुभव कर सकें. उनकी शैली की खासियत यह है कि वे योग को बेहद सरल भाषा और सहज तरीके से समझाते हैं, जिससे हर वर्ग का व्यक्ति इसे आसानी से अपने जीवन में अपना सके.
योग साधना के बारे में बहुत से लोगों ने सुना है, कुछ लोगों को इसका सीमित ज्ञान है, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे हैं जिन्होंने इसे वास्तव में अनुभव किया है. योग को शब्दों में पूरी तरह नहीं बताया जा सकता, क्योंकि यह अनुभव का विषय है. इसे समझने के लिए व्यक्ति को खुद ही अभ्यास करना पड़ता है. योग हमें यह सिखाता है कि आत्म-विकास का मार्ग बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही मौजूद है. हमें अपने भीतर की गहराइयों में उतरकर उस सत्य को खोजना होता है, जो हमेशा से हमारे अंदर रहा है.
योग कैसे डालता है जीवन पर सकारात्मक असर
आधुनिक जीवनशैली में लोग शारीरिक और मानसिक तनाव से घिरे हुए हैं. हाई ब्लडप्रेशर, शुगर, अनिद्रा, दमा, पाचन संबंधी समस्याएं और ऐसी ही तमाम मन और शरीर के रोगों का होना आम हो गया है. इनका मुख्य कारण तनाव और असंतुलित जीवनशैली है. योग साधना इन समस्याओं से राहत दिलाने का एक प्रभावी और प्राकृतिक तरीका है. नियमित अभ्यास से शरीर को विश्राम, मन को शांति और जीवन में संतुलन मिलता है. यह विश्राम इतना गहरा होता है कि कई बार यह नींद से भी अधिक सुकून देने वाला होता है.
जहां दवाइयां केवल शरीर के किसी एक हिस्से के रोग को ठीक करती हैं, वहीं योग पूरे व्यक्तित्व पर काम करता है. यह शरीर, मन और भावनाओं को एक साथ संतुलित करता है. योग हमें सिखाता है कि सुख और शांति बाहर की चीजों में नहीं, बल्कि हमारे अपने मन में छिपी होती है. यदि हम अपने मन को बदल लें, तो जीवन अपने आप बेहतर हो जाता है. बिना मन को बदले बाहरी दुनिया में सुख खोजने की कोशिश करना एक भ्रम के समान है.
इस योग साधना सत्र में शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. प्राचीन योग ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के नजरिये से समझाना, ताकि लोग इसे अपने दैनिक जीवन में आसानी से लागू कर सकें. यह सत्र न केवल तनाव को कम करने में मदद करेगा, बल्कि व्यक्ति की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाएगा.
रविवार तक जारी है योग सत्र
तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिदिन दो सत्र आयोजित हो रहे हैं. सुबह का सत्र 6:30 बजे से 8:30 बजे तक और शाम का सत्र 6:00 बजे से 8:00 बजे तक चलेगा. 1 मई (शुक्रवार), 2 मई (शनिवार) और 3 मई (रविवार) को आयोजित इन सत्रों में भाग लेकर साधक योग की गहराई को समझ सकते हैं और उसे अपने जीवन का हिस्सा बना सकते हैं.
यह आयोजन हर उस व्यक्ति के लिए है जो अपने जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मकता लाना चाहता है. चाहे आप योग के पुराने साधक हों या पहली बार इसके संपर्क में आ रहे हों, यह आपके लिए एक अनमोल अवसर है. सामूहिक साधना का वातावरण व्यक्ति को अधिक गहराई से जोड़ता है और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराता है.
यह समय है रुककर अपने भीतर झांकने का. अपने जीवन की भागदौड़ के बीच कुछ पल निकालकर खुद से जुड़ने का. ‘भारत योग यात्रा – दिल्ली 2026’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा अवसर है, जो आपको एक अधिक सजग, संतुलित और आनंदमय जीवन की ओर ले जा सकता है.
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