आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुमारगंज परिसर में ‘एकीकृत एवं विविधापूर्ण जलजीव पालन तकनीकी एवं प्रबंधन’ विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है। यह प्रशिक्षण हाईटेक हॉल में आयोजित किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. प्रमाणिक ने इस अवसर पर कहा कि मत्स्य पालन के क्षेत्र में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने बताया कि राज्य में नदी, झील और तालाब के रूप में पर्याप्त जलीय संसाधन मौजूद हैं, जिनका समुचित उपयोग कर मछली उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
डॉ. प्रमाणिक ने मत्स्य पालकों से नवीनतम तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य सरकार और विश्वविद्यालय मत्स्य पालकों के साथ मिलकर समन्वय से कार्य कर रहे हैं।
मात्स्यिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. सी.पी. सिंह ने मत्स्य पालकों को मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने सुझाव दिया कि किसान मछली पालन के साथ-साथ धान की खेती, मुर्गी और बत्तख पालन करके अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।
डॉ. सिंह ने मात्स्यिकी क्षेत्र के आर्थिक योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश की अर्थव्यवस्था में इसका योगदान 1.1 प्रतिशत है, जबकि कृषि क्षेत्र में मात्स्यिकी का योगदान 8 प्रतिशत है। उन्होंने जोर दिया कि एकीकृत मत्स्य पालन से किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बस्ती, विंध्याचल और आजमगढ़ जिलों से लगभग 50 किसानों ने भाग लिया है। इन किसानों को जलजीव पालन की उन्नत तकनीकें, रोग प्रबंधन, आहार व्यवस्था और विपणन के तरीके सिखाए जा रहे हैं।
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