भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर विदेश से बड़ी चेतावनी आई है. स्विट्जरलैंड स्थित ग्लोबल फाइनेंशियल कंपनी यूबीएस (UBS) ने भारत की ग्रोथ से जुड़ी ये वॉर्निंग दी है. अपनी रिपोर्ट में यूबीएस ने कहा है कि वैश्विक तनाव के चलते गहराए तेल संकट की वजह से वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी ग्रोथ (India GDP Growth) की रफ्तार कम होगी और कंपनी ने इसका अनुमान घटाकर अब 6.2 फीसदी कर दिया है.
यूबीएस रिसर्च की एक नई रिपोर्ट में भारत को लेकर चिंता वाले अनुमान जाहिर किए गए हैं. इसमें कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष की वजह से लंबे समय तक ऊर्जा संकट पैदा होने, सप्लाई चेन बुरी तरह से बाधित होने और महंगाई में इजाफे के कारण FY27 में भारत की आर्थिक ग्रोथ में तेज गिरावट आ सकती है.
GDP ग्रोथ की रहेगी ये रफ्तार
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म यूबीएस का कहना है कि तेल संकट समेत अन्य कारकों की वजह से वित्त वर्ष 27 के लिए India GDP Growth का अनुमान घटाकर 6.2 फीसदी किया जा रहा है. कंपनी ने इसमें 50 बेसिस पॉइंट की कटौती की है. इससे पहले UBS ने भारत की जीडीपी के 6.7% की रफ्तार से आगे बढ़ने का पूर्वानुमान जताया था.
यूबीएस ने कहा है कि मार्च महीने में भारत की आर्थिक रफ्तार धीमी होती नजर आई है. मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटीज कमजोर हुई हैं और कोर सेक्टर की ग्रोथ में भी कमी आई है. एलपीजी की कमी (LPG Shortage In India) और राशनिंग के बीच फर्टिलाइजर्स प्रोडक्शन में भारी गिरावट दर्ज की गई है.
जीडीपी में रुकावट के ये 3 कारण
पहला: UBS की रिपोर्ट में भारतीय इकोनॉमी की रफ्तार में रुकावट के पीछे तीन बड़े कारण बताए गए हैं. इनमें पहला अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से गहराया तेल संकट है. ब्रोकरेज ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो फिर जोखिम और भी बढ़ जाएगा. हाल ही में अमेरिकी वॉरशिप पर ईरानी अटैक के बाद क्रूड की कीमतें फिर से 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं.
रिपोर्ट में कहा गया कि Middile East Conflict कच्चे तेल की सप्लाई में व्यवधान से आगे बढ़कर रिफाइंड फ्यूल सप्लाई, शिपिंग रूट्स और इंडस्ट्रियल सप्लाई चेनों को प्रभावित कर रहा है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए ऐतिहासिक रूप से बड़ा ऊर्जा संकट पैदा हो रहा है. ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल रहने पर वित्त वर्ष 2027 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.2% हो जाएगी.
दूसरा: मानसून की स्थिति बिगड़ती है, तो देश की इकोनॉमी को बड़ा झटका लग सकता है और जोखिम बढ़ सकता है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पहले लॉन्गटर्म पूर्वानुमान में 2026 के मानसून सीजन के लिए सामान्य से कम वर्षा का अनुमान लगाया गया है, जिससे ग्रामीण मांग और खाद्य मंहगाई पर दबाव बढ़ रहा है.
रिपोर्ट में कहा गया कि अगर वर्षा सामान्य से कम रहती है तो ग्रामीण मांग और कमजोर हो सकती है. जून-सितंबर अवधि के दौरान अल नीनो की स्थिति की 60% से अधिक संभावना कृषि उत्पादन, ग्रामीण मजदूरी और एफएमसी की मांग के लिए जोखिम बढ़ाती है. भारत के ग्रामीण क्षेत्र कुल एफएमसी खपत में लगभग 38% का योगदान करते हैं.
तीसरा: यूबीएस के मुताबिक, घरेलू उपभोग भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 56% हिस्सा है. ये महंगाई के हाई पर पहुंचने, कम नॉमिनल इनकम और कमजोर रोजगार स्थितियों के कारण बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है.
ईंधन और परिवहन मिलकर घरेलू खर्च का लगभग 15-16% हिस्सा बनाते हैं, जिससे उपभोक्ता एनर्जी प्राइस में लगातार होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं. यूबीएस ने रुपये के और कमजोर होने की उम्मीद है और 2027 के अंत तक USD/INR का स्तर 96 रहने का अनुमान लगाया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई की चिंताओं के चलते आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर हो सकता है.
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