तमिलनाडु: विजय की सबसे ज़्यादा सीटें फिर भी सरकार बनाने का न्योता क्यों नहीं दे रहे हैं गवर्नर – BBC

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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने सबसे ज्यादा सीटें जीतकर द्रविड़ पार्टियों को हराया. हालांकि, 234 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 सीटों का आंकड़ा उसे नहीं मिला.
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने पांच सीटें जीतीं.
डीएमके-कांग्रेस गठबंधन, जिसने पिछले एक दशक में कई चुनाव एक साथ लड़े थे, अब टूट गया है. कांग्रेस ने कहा है कि वह विजय की टीवीके को सरकार बनाने में समर्थन देगी.
हालांकि कांग्रेस के एक वर्ग ने चुनाव से पहले टीवीके के साथ गठबंधन करने की इच्छा खुलकर व्यक्त की थी, लेकिन अब जब कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत नहीं है, तो उसने टीवीके का समर्थन किया है.
ऐसे में 108 सीटें जीतने वाली टीवीके को कांग्रेस का समर्थन तो मिल गया है, लेकिन बहुमत का जादुई आंकड़ा अब भी दूर है.
बहुमत की ज़रूरी संख्या हासिल करने के लिए विजय ने जीएमके गठबंधन की कुछ अन्य पार्टियों से भी समर्थन मांगा है. टीवीके नेता विजय ने बुधवार को तमिलनाडु के कार्यवाहक राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया.
लेकिन सरकार बनाने का दावा पेश करने के बावजूद तमिलनाडु के राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया है. यह तमिलनाडु की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है.
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जब किसी विधानसभा चुनाव में कोई भी राजनीतिक पार्टी या गठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर पाता, तो उसे "हंग असेंबली या त्रिशंकु विधानसभा" कहा जाता है.
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ऐसे में तमिलनाडु की सियासत में कई सवाल उछल रहे हैं कि क्या राज्यपाल जानबूझकर सबसे बड़ी पार्टी टीवीके को सरकार बनाने का न्योता नहीं दे रहे हैं. या फिर क्या परंपरागत रूप से प्रतिद्वंद्वी रहीं डीएमके और एआईएडीएमके की गठबंधन सरकार की संभावना भी बन सकती है.
टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार बनाने के लिए कुछ विकल्पों हो सकते हैं.
इनमें से एक है दूसरी पार्टियों का समर्थन जुटाना, और इसके लिए केवल कांग्रेस का समर्थन पर्याप्त नहीं होगा. ऐसे में दो-दो सीटों वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और सीपीआई ने भी टीवीके को समर्थन देने के संकेत दिए हैं.
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इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने भी दो सीटें हासिल की हैं और उसने भी संकेत दिया है कि वह अगली सरकार को 'रचनात्मक और आलोचनात्मक' समर्थन दे सकती है. इस तरह टीवीके प्लस की कुल संख्या 119 तक पहुंच सकती है, जो बहुमत के आंकड़े से आगे है.
दूसरा विकल्प अल्पमत सरकार बनाने का है.सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल टीवीके को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं, और फिर टीवीके राज्य की सियासी पार्टियों को अपना सहयोगी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है. हालाँकि डीएमके या एआईएडीएमके तरफ से इस दिशा में अभी किसी तरह के संकेत नहीं मिले हैं.
बीबीसी तमिल के मुताबिक तमिलनाडु की राजनीति में जारी हलचल के बीच एआईएडीएमके के कई विधायकों को पुडुचेरी के एक निजी होटल में ठहराया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि एआईएडीएम के एक गुट का मानना है कि पार्टी को टीवीके का समर्थन करना चाहिए, जबकि दूसरा गुट इसके ख़िलाफ़ है. इस मुद्दे पर पार्टी के महासचिव ईके पलानीस्वामी की अध्यक्षता में बुधवार को एक बैठक हुई.
हालांकि, एआईएडीएमके के पूर्व मंत्री केपी मुनुस्वामी ने कहा है कि टीवीके को एआईएडीएमके का समर्थन मिलने की ख़बर झूठी है.
इस बारे में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "यह ख़बरें और राय सामने आ रही हैं कि एआईएडीएमके टीवीके का समर्थन कर रही है, लेकिन यह पूरी तरह झूठी खबर है. मैं महासचिव पलानीस्वामी की अनुमति से आपको बताना चाहता हूं कि किसी भी परिस्थिति में एआईएडीएमके ने टीवीके का समर्थन नहीं किया है."
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हालांकि टीवीके बहुमत के आंकड़े से सिर्फ़ 10 सीट पीछे है, लेकिन सरकार बनाने के लिए पार्टी को वास्तव में कम से कम 12 अतिरिक्त विधायकों की ज़रूरत होगी.
ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी की जीती हुई 108 सीटों में से दो- तिरुचिरापल्ली ईस्ट और पेरांबुर- दोनों पर विजय ने जीत हासिल की है.
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, उन्हें एक सीट खाली करनी होगी, जिससे पार्टी की संख्या घटकर 107 रह जाएगी.
इसके अलावा, पार्टी को एक विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) भी चुनना होगा. स्पीकर चुने जाने के बाद विश्वास मत के दौरान वोट नहीं देता, जिससे टीवीके की प्रभावी संख्या घटकर 106 रह जाएगी.
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बीबीसी तमिल के मुताबिक सेवानिवृत्त न्यायाधीश हरिपरंथमन कहते हैं, "राज्यपाल यह नहीं कह सकते कि वह केवल तभी शपथ ग्रहण की अनुमति देंगे जब पूरी संख्या दिखाई जाए."
उन्होंने बीबीसी तमिल से बातचीत में कहा, "सरकार गठन के लिए आमंत्रित करने का अधिकार राज्यपाल के पास होता है. जब किसी (पार्टी) के पास स्पष्ट बहुमत न हो, तब दावेदार पार्टी से संख्या साबित करने के लिए कहना गलत नहीं है."
उन्होंने आगे कहा, "लेकिन साथ ही यह नहीं कहा जा सकता कि पूरी ताकत दिखाने पर ही शपथ ग्रहण की अनुमति दी जाएगी. बहुमत साबित करने की सही जगह विधानसभा होती है."
सुप्रीम कोर्ट के वकील करपका विनायगम का कहना है, "अगर राज्यपाल को दावेदार पार्टी पर भरोसा है, तो वह सरकार बनाने के लिए बुलावा देंगे."
उन्होंने बीबीसी तमिल से बातचीत में कहा, "राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा करने वाली पार्टी को जवाब देना चाहिए. इसके लिए कोई समय सीमा तय नहीं की जा सकती, लेकिन साथ ही वह बहुत ज्यादा समय भी नहीं ले सकते."
उन्होंने कहा, "विधानसभा भंग होने के बाद उसे लंबे समय तक खाली नहीं रखा जा सकता, इसलिए राज्यपाल को इस मामले में जल्दी फैसला लेना चाहिए."
सरकार बनाने का दावा करने वाली पार्टी को राज्यपाल की अनुमति मिलने के बाद शपथ ग्रहण समारोह होगा. राज्यपाल मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पद की शपथ दिलाएंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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