भारत का स्ट्रीमिंग सेक्टर अब बड़े खिलाड़ियों के एकीकरण (consolidation) के दौर से गुजर रहा है। Amazon जैसी बड़ी कंपनियाँ अपने वीडियो प्लेटफॉर्म्स को एक साथ ला रही हैं, जिसका मुख्य मकसद स्केल बनाना, प्रॉफिट बढ़ाना और सब्सक्राइबर ग्रोथ में आ रही सुस्ती व बढ़ते कंटेंट कॉस्ट से निपटना है। इस बीच, कंपनियाँ सब्सक्रिप्शन (SVOD) के साथ-साथ एडवरटाइजिंग (AVOD) और ट्रांजैक्शनल वीडियो को मिलाकर हाइब्रिड मॉडल अपना रही हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को जोड़ा जा सके और रेवेन्यू स्ट्रीम को बढ़ाया जा सके।
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Amazon का अपने Prime Video को MX Player के साथ इंटीग्रेट करने का फैसला, भारत के स्ट्रीमिंग दिग्गजों के लिए एक बड़ी स्ट्रेटेजिक चाल है। यह कदम JioCinema और Disney+ Hotstar के JioHotstar में इंटीग्रेशन के बाद आया है, जो इंडस्ट्री की एकunified मनोरंजन प्लेटफॉर्म्स की ओर स्पष्ट मंशा दिखाता है। इसका लक्ष्य सब्सक्रिप्शन वीडियो (SVOD) को एडवरटाइजिंग-आधारित (AVOD) और ट्रांजैक्शनल वीडियो सेवाओं के साथ जोड़ना है।
स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री सब्सक्राइबर ग्रोथ में कमी और कंटेंट की बढ़ती लागत जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। इससे प्लेटफॉर्म्स पर प्रॉफिटेबल बनने का दबाव बढ़ गया है, खासकर भारत जैसे प्राइस-सेंसिटिव मार्केट में। सेवाओं को मर्ज करके, कंपनियां कस्टमर चर्न (ग्राहक का प्लेटफॉर्म छोड़ना) को कम करने, कंटेंट की खोज को बेहतर बनाने और उपयोगकर्ताओं को एक ही इकोसिस्टम में बनाए रखने का लक्ष्य रखती हैं। यह स्ट्रेटेजी बड़ी संख्या में फ्री और पेड व्यूअर्स को मिलाकर कमाई की संभावना को भी बढ़ाती है।
Amazon, MX Player के विशाल फ्री यूजर बेस का इस्तेमाल करके समय के साथ दर्शकों को पेड Prime सब्सक्राइबर्स में बदलने की उम्मीद कर रहा है। साथ ही, यह इंटीग्रेशन Amazon के एडवरटाइजिंग बिज़नेस और भारत के तेजी से बढ़ते AVOD मार्केट में उसकी पकड़ को मजबूत करता है। कंपनी ने पिछले साल ही एक ऐड-सपोर्टेड टियर लॉन्च किया था, जिसमें ऐड-फ्री देखने के लिए सालाना ₹699 या मासिक ₹129 अतिरिक्त देने होते हैं।
एडवरटाइजिंग-आधारित स्ट्रीमिंग की ओर यह बदलाव एक ग्लोबल ट्रेंड है। Netflix, जो पहले से ही दुनिया भर में ऐड-सपोर्टेड प्लान पेश करता है, इस साल के अंत तक भारत में भी इसी तरह का लॉन्च करने की योजना बना रहा है। भारत एक प्रमुख ग्रोथ मार्केट है, जो सस्ते मोबाइल डेटा, स्मार्टफोन के व्यापक उपयोग और डिजिटल कंटेंट की बढ़ती खपत से प्रेरित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, OTT पर मंथली एक्टिव यूजर्स की संख्या 1.45 बिलियन (CLSA) है और 915 मिलियन से अधिक एक्टिव इंटरनेट यूजर्स (Nielsen) हैं।
PwC India के पार्टनर राजेश सेठी का कहना है कि प्रीमियम स्ट्रीमिंग और फ्री एड-सपोर्टेड प्लेटफॉर्म्स का एक साथ आना, इंडस्ट्री को हाइब्रिड मॉडल की ओर ले जा रहा है जो स्केल और कमाई की क्षमता को संतुलित करता है। उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्रीय पहुंच, सब्सक्रिप्शन कंटेंट और कॉमर्स से जुड़े एडवरटाइजिंग को मिलाकर यूजर कन्वर्जन, एंगेजमेंट को बढ़ाया जा सकता है, रेवेन्यू में विविधता लाई जा सकती है और विभिन्न दर्शक समूहों के लिए अधिक टिकाऊ बिजनेस मॉडल बनाए जा सकते हैं।
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