Exclusive: अमेरिका-भारत को क्यों मानता है अपना Key Security Partner? पूर्व DRDO चीफ ने बताई खास वजह – ABP News

Operation Sindoor First Anniversary: भारत में ऑपरेशन सिंदूर के 7 मई को एक साल हो गए हैं. ऐसे में भारत की मिसाइलों ने पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने में अहम भूमिका निभाई थी, उसकी चर्चा में दुनियाभर में हुई थी.  ऐसे में एबीपी न्यूज के Exclusive Podcast (The Journey With Romana) में DRDO के पूर्व चीफ रहे डॉ सुधीर कुमार मिश्रा ने चर्चा की है.  इस दौरान उनसे सुखोई-30, QUAD और इंडो पेसिफिक को लेकर चर्चा की गई. इस दौरान जो अहम सवाल पूछा गया कि अमेरिका भारत को क्यों अपना Key Security Partner मानता है?
इस पर DRDO के पूर्व चीफ सुधीर मिश्रा ने कहा कि सुखोई -30 की रेंज ही काफी ज्यादा है. सुखोई 30 की रेंज की 3 हजार 400 किमी है. यानी कि आप 2 हजार किमी से लेकर तीन हजार तक के टारगेट पर हमला कर सकते हैं. अगर एयरक्राफ्ट को रिफ्यूल किया जाता है, हवा में तो यह रेंज 4 हजार के पार तक चली जाती है. इसके अलावा आने जाने में अगर रिफ्यूल किया जाता है, तो इसकी रेंज पांच हजार तक पहुंच सकती है. तो जब QUAD में अमेरिका ने कहा था कि भारत की जिम्मेदारी इंडो स्पेसिफिक ओशियन की है, तो आप प्रशांत महासागर तक जा सकते हो.
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सुखोई की जिम्मेदारी है, सुरक्षा देना है, भारत के आसपास के समुद्री इलाकों को. इनमें बंगाल की खाड़ी, प्रशांत महासागर और हिंद महासागर शामिल है. इसी वजह से अमेरिका Key Security Partner भारत को मानता है. इसके अलावा उन्होंने रूस को कितनी ब्रम्होस मिसाइल देने की बात पर किसी तरह की जानकारी नहीं दी है. उन्होंने इसे रूस की तरफ से जानकारी देने के ऊपर छोड़ दिया है. 

भारत के स्वदेशी हथियारों पर सेना का विश्वास बढ़ा है
DRDO के पूर्व चीफ ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के स्वदेशी हथियारों का उपयोग किया गया. इस दौरान उन हथियारों से सटीक हमले किए. इससे भारतीय सेना को उनपर काफी विश्वास हुआ. सेना मानती है कि भारत में डिजाइन या बनाए गए हथियार बढ़िया काम करते हैं. ऐसे में आत्म निर्भर भारत पर फोकस करने की मांग सेना ने की है. इससे पहले सेना को कम भरोसा होता था. वह विदेश हथियारों को भारतीय हथियारों की तुलना में बेहतर मानते थे. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेनाओं और डीआरडीओ के बीच आपस में लगाव मजबूत हुआ है. 
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Source: IOCL
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