देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर (IITK) के दफ्तरों में अब हिंदी की गूंज और अधिक सुनाई देगी। संस्थान में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यक्षेत्र में हिंदी के प्रयोग में दक्ष बनाने के लिए पांच दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
न्यू कोर लैब में आयोजित इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में 51 कर्मचारियों ने हिस्सा लिया, जिन्हें गृह मंत्रालय के विशेषज्ञों ने दफ्तर के काम को आसान बनाने के गुर सिखाए।
अब फाइलों पर हिंदी में नोटिंग लिखना होगा आसान
अक्सर तकनीकी संस्थानों में अंग्रेजी का बोलबाला रहता है, जिससे कर्मचारियों को हिंदी में नोटिंग या ड्राफ्टिंग करने में झिझक होती है। इसी को दूर करने के लिए नई दिल्ली से आए प्रशिक्षक बंकट लाल शर्मा और विनोद कुमार ने कर्मचारियों को कार्यालयीन हिंदी के स्वरूप और पारिभाषिक शब्दावली की जानकारी दी।
अब कर्मचारी फाइलों पर आसानी से हिंदी में टिप्पणी लिख सकेंगे और सरकारी नियमों के मुताबिक ड्राफ्ट तैयार कर पाएंगे।
AI टूल्स और सॉफ्टवेयर का मिलेगा सहारा
कार्यशाला की सबसे खास बात तकनीकी सत्र रहा। इसमें राजभाषा विभाग द्वारा विकसित एआई (AI) टूल्स और बहुभाषी अनुवाद सॉफ्टवेयर के बारे में विस्तार से बताया गया। आधुनिक सॉफ्टवेयर की मदद से अब लंबे दस्तावेजों का अनुवाद करना और हिंदी में टाइपिंग करना बेहद सुलभ हो जाएगा।
संस्थान का मानना है कि इन टूल्स के इस्तेमाल से राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित वार्षिक लक्ष्यों को समय पर पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी।
प्रमाण पत्र देकर बढ़ाया उत्साह
पांच दिनों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद समापन समारोह में आईआईटी कानपुर के उप निदेशक प्रोफेसर ब्रज भूषण और कुलसचिव विश्व रंजन ने सभी 51 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र सौंपे। संस्थान के अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसी कार्यशालाएं आयोजित की जाती रहेंगी ताकि तकनीकी संस्थान होने के बावजूद हिंदी के कार्यान्वयन में कोई कमी न रहे। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षकों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित भी किया गया।
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