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भारत ने MIRV तकनीक से लैस उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण कर अपनी रणनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया है। यह परीक्षण भारत को उन चुनिंदा देशों में शामिल कर …और पढ़ें
MIRV ताकत से दुनिया में गूंजी भारत की धमक (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने एडवांस अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण कर अपनी रणनीतिक ताकत को एक बार फिर दुनिया के सामने दिखाया है। इस मिसाइल में MIRV यानी मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब है कि एक ही मिसाइल अलग-अलग दिशाओं में कई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।
ओडिशा तट के पास डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किए गए इस परीक्षण के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह अग्नि-V का उन्नत संस्करण है या फिर भविष्य की अग्नि-VI मिसाइल की शुरुआती झलक। डीआरडीओ प्रमुख समीर वी कामत ने भी कहा है कि सरकार की मंजूरी मिलते ही संगठन अग्नि-VI कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
यह परीक्षण सिर्फ एक मिसाइल लॉन्च नहीं माना जा रहा, बल्कि भारत की रणनीतिक और परमाणु क्षमता में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। अब भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास एक मिसाइल से कई परमाणु वारहेड दागने की क्षमता मौजूद है।
अग्नि मिसाइल कार्यक्रम की शुरुआत 1983 में इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत हुई थी। इस कार्यक्रम का नेतृत्व पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था, जिन्हें भारत के मिसाइल कार्यक्रम का जनक माना जाता है।
अग्नि श्रृंखला को विकसित करने में अविनाश चंदर और डॉ. टेसी थॉमस की भी बड़ी भूमिका रही। डॉ. टेसी थॉमस को भारत की “मिसाइल वुमन” कहा जाता है। उन्होंने अग्नि-IV और अग्नि-V परियोजनाओं में अहम योगदान दिया।
शुरुआत में अग्नि परियोजना को हथियार प्रणाली के रूप में नहीं बल्कि एक तकनीकी परीक्षण कार्यक्रम के तौर पर शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य री-एंट्री तकनीक विकसित करना था, जिसमें मिसाइल अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी के वातावरण में बेहद तेज गति से प्रवेश करती है।
1980 और 1990 के दशक में भारत को मिसाइल तकनीक हासिल करने में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) के कारण भारत को कई अहम तकनीकें नहीं मिल सकीं।
इसके बाद डीआरडीओ ने स्वदेशी तकनीक पर काम शुरू किया। वैज्ञानिकों ने ठोस ईंधन, नेविगेशन सिस्टम, कंपोजिट मटेरियल और अत्यधिक तापमान झेलने वाले हीट शील्ड जैसी तकनीकें देश में ही विकसित कीं। 1989 में पहली अग्नि तकनीकी परीक्षण मिसाइल सफल रही और यहीं से भारत के लंबी दूरी वाले रणनीतिक मिसाइल कार्यक्रम की मजबूत नींव पड़ी।
बैलिस्टिक मिसाइल सामान्य क्रूज मिसाइल से अलग तरीके से काम करती है। यह पहले रॉकेट की मदद से ऊंचाई पर जाती है, फिर अंतरिक्ष के रास्ते तय कर लक्ष्य की ओर बेहद तेज गति से लौटती है।
इसकी उड़ान तीन चरणों में होती है बूस्ट फेज, मिडकोर्स फेज और टर्मिनल फेज। मिडकोर्स चरण में MIRV तकनीक काम करती है, जहां एक मिसाइल कई वारहेड अलग-अलग लक्ष्यों की ओर भेज सकती है।
टर्मिनल फेज में वारहेड हाइपरसोनिक गति से वातावरण में प्रवेश करते हैं। इतनी तेज रफ्तार के कारण इन्हें रोकना बेहद मुश्किल होता है। यही वजह है कि MIRV तकनीक को आधुनिक रणनीतिक हथियारों में बेहद अहम माना जाता है।
कारगिल युद्ध के बाद अग्नि-I को विकसित किया गया। इसकी मारक क्षमता लगभग 700 से 1200 किलोमीटर है और इसे पाकिस्तान के खिलाफ तेज जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार किया गया था।
इसके बाद अग्नि-II और अग्नि-III ने भारत की मारक क्षमता को चीन तक पहुंचाया। अग्नि-IV ने ज्यादा सटीकता और बेहतर तकनीक दी, जबकि अग्नि-V ने भारत को लंबी दूरी की मिसाइल शक्ति वाले देशों की श्रेणी में पहुंचा दिया। इसकी रेंज 5000 किलोमीटर से ज्यादा मानी जाती है।
अग्नि-V को कैनिस्टर लॉन्च तकनीक से तैयार किया गया है, जिससे इसे कम समय में कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है। इससे इसकी सुरक्षा और जवाबी क्षमता दोनों बढ़ जाती हैं।
मार्च 2024 में भारत ने मिशन दिव्यास्त्र के तहत पहली बार MIRV तकनीक का सफल परीक्षण किया था। इस तकनीक से एक मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर वार कर सकती है। इस सफलता के बाद भारत अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों की सूची में शामिल हो गया जिनके पास MIRV क्षमता मौजूद है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणाली को कमजोर करने में बेहद प्रभावी मानी जाती है क्योंकि एक साथ कई वारहेड को रोकना कठिन होता है।
अग्नि-प्राइम यानी अग्नि-P को अगली पीढ़ी की मध्यम दूरी की मिसाइल माना जा रहा है। यह हल्की, ज्यादा आधुनिक और तेजी से लॉन्च होने वाली मिसाइल है। इसकी रेंज लगभग 1000 से 2000 किलोमीटर बताई जाती है।
वहीं अग्नि-VI को भारत की भविष्य की सबसे ताकतवर मिसाइल परियोजना माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी रेंज 8000 से 12000 किलोमीटर तक हो सकती है और इसमें कई MIRV वारहेड लगाए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि अग्नि-VI को जमीन के साथ-साथ पनडुब्बियों से भी लॉन्च किया जा सकेगा। इससे भारत की सेकंड स्ट्राइक क्षमता और मजबूत होगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अग्नि-IV, अग्नि-V और अग्नि-VI जैसे कार्यक्रमों के पीछे चीन की बढ़ती सैन्य ताकत एक बड़ा कारण है। चीन तेजी से लंबी दूरी की मिसाइलें और मिसाइल साइलो तैयार कर रहा है। हाल के ईरान-अमेरिका तनाव और दुनिया भर में बढ़ती मिसाइल प्रतिस्पर्धा ने भी यह दिखाया है कि आधुनिक युद्ध में बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन कितने अहम हो चुके हैं।
भारत की परमाणु नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ पर आधारित है, यानी भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, लेकिन हमला होने पर जोरदार जवाब देगा। इसी रणनीति में अग्नि मिसाइल श्रृंखला भारत की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है।
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