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आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर बयान दिया है. पवन कल्याण ने कहा कि केंद्र सरकार की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी का समर्थ जरूरी है. ज्यादा भाषाएं सीखने से ज्ञान का दायरा बढ़ता है, कम नहीं होता.
पवन कल्याण ने कहा कि ‘चाहे वह हिंदी हो, तमिल हो या कोई अन्य भाषा. आंध्र प्रदेश की खासियत यह है कि यहां मातृभाषा की रक्षा करते हुए दूसरी सभी भाषाओं का भी सम्मान किया जाता है.’
उन्होंने बताया कि लिंग्विस्टिक स्टेट्स की मांग का आंदोलन भी इसी धरती से शुरू हुआ था, और इसी ने भारत की संघीय व्यवस्था को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत किया.
पवन कल्याण ने आगे कहा कि ‘कई लोग सोच सकते हैं कि पड़ोसी राज्यों की समस्याओं से हमें क्या लेना-देना? कहीं कुछ हो रहा है तो हमें प्रतिक्रिया क्यों देनी चाहिए? लेकिन हर जनसैनिक और हर नेता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखनी चाहिए.’
सनातन धर्म पर बोले पवन कल्याण
पवन कल्याण ने सनातन धर्म की खासियत बताई है. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को मिटाया नहीं जा सकता. वहीं, आलोचकों पर निशाना साधते हुए उन्होंने जर्मन दार्शनिक आर्थर शोपेनहावर का जिक्र भी किया. पवन कल्याण ने कहा कि जो लोग सनातन धर्म का अपमान करते हैं, उन्हें हमारी बात शायद पसंद न आए, लेकिन शोपेनहावर की बात वे शायद समझ सकेंगे.
पवन कल्याण ने शोपेनहावर का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने वेद और उपनिषद की विशेषता बताई, साथ ही इसे 19वीं सदी का सबसे महान उपहार भी कहा था.
उन्होंने कहा कि शोपेनहावर का मानना था कि अगर हम अपनी विचारधाराओं से भारत को बदलने का प्रयास करेंगे, तो यह हिमालय की चोटी पर छोटी गोली चलाने जैसा होगा. इसकी भव्यता और महिमा इतनी विशाल है कि इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि यह हमारे विचारों को ही बदल देगा.
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