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देश में घटती जन्म दर के बीच सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। अब तीसरे बच्चे के जन्म पर 30 हजार और चौथे बच्चे पर 40 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। नई जनसंख्या नीति को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।
Hindi News : देश में लगातार घटती जन्म दर अब सरकारों के लिए चिंता का बड़ा विषय बनती जा रही है। बदलती जीवनशैली, बढ़ते खर्च और छोटे परिवार की सोच के कारण ज्यादातर दंपति अब एक या दो बच्चों तक ही सीमित रहना पसंद कर रहे हैं। इसका असर आने वाले समय में अर्थव्यवस्था और कार्यबल पर पड़ सकता है। इसी चिंता के बीच एक राज्य सरकार ने तीसरे और चौथे बच्चे के जन्म पर आर्थिक सहायता देने की बड़ी घोषणा की है।
शनिवार को आंध्र प्रदेश में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंच से सीएम के तरफ से ऐलान किया गया कि अब तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवार को 30 हजार रुपये दिए जाएंगे। वहीं चौथे बच्चे के जन्म पर 40 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। यह रकम बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उपलब्ध कराई जाएगी।
इससे पहले मार्च 2025 में विधानसभा में दूसरे बच्चे के जन्म पर 25 हजार रुपये देने का प्रस्ताव रखा गया था। बाद में सरकार ने अपनी योजना में बदलाव करते हुए तीसरे और चौथे बच्चे को प्रोत्साहन देने का फैसला लिया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी इस नई नीति की पुष्टि की गई थी।
कार्यक्रम के दौरान कहा गया कि आज के समय में अधिकतर परिवार सिर्फ एक बच्चा रखना चाहते हैं। अच्छी आय और बेहतर जीवनशैली की चाहत के कारण लोग छोटे परिवार को ही सही मान रहे हैं। कई परिवार दूसरा बच्चा तभी चाहते हैं जब पहला बेटा न हो। इस सोच का असर सीधे जन्म दर पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी राज्य या देश की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए प्रति महिला औसतन 2.1 बच्चों का जन्म जरूरी माना जाता है। यदि यह दर लगातार घटती रही तो आने वाले वर्षों में काम करने वाली युवा आबादी कम हो जाएगी। इसका असर उद्योग, खेती, कारोबार और आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।
सभा में यह भी कहा गया कि बच्चों को बोझ समझने की मानसिकता बदलनी होगी। बच्चों को देश और समाज की ताकत बताते हुए कहा गया कि आने वाले समय में वही आर्थिक और सामाजिक विकास की नींव बनेंगे। सरकार का मानना है कि यदि युवा आबादी कम होती गई तो भविष्य में कई क्षेत्रों में श्रमिकों और कर्मचारियों की कमी देखने को मिल सकती है।
दुनिया के कई विकसित देशों में पहले से ही घटती जनसंख्या बड़ी चुनौती बन चुकी है। जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों में सरकारें लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए आर्थिक मदद और दूसरी सुविधाएं दे रही हैं। अब भारत के कुछ राज्यों में भी इसी तरह की चिंता सामने आने लगी है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि नई योजना की विस्तृत गाइडलाइन एक महीने के भीतर जारी की जाएगी। इसमें पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और सहायता राशि से जुड़े सभी नियम स्पष्ट किए जाएंगे। माना जा रहा है कि इस योजना के जरिए ज्यादा बच्चों वाले परिवारों को आर्थिक मदद देने के साथ-साथ भविष्य के लिए जनसंख्या संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाएगी। आंध्र प्रदेश सरकार का कहना है कि राज्य की आर्थिक मजबूती और भविष्य की श्रमशक्ति को सुरक्षित रखने के लिए जनसंख्या संतुलन बेहद जरूरी है।
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