पिता की मौत ने तोड़ा परिवार, मां ने नहीं टूटने दिए सपने… अब UPPCS में 10वीं रैंक लाकर SDM बने आयुष पांडेय – Hindustan Hindi News

कुछ कहानियां सिर्फ सफलता की नहीं होतीं, बल्कि उन जख्मों की भी होती हैं जिन्हें इंसान चुपचाप सहकर अपने सपनों को जिंदा रखता है। उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले आयुष पांडेय की कहानी भी ऐसी ही है। आज लोग उन्हें UPPCS 2024 में 10वीं रैंक हासिल करने वाले अफसर के रूप में जानते हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे वर्षों का संघर्ष, दर्द और लगातार मेहनत छिपी हुई है। साल 2010 में आयुष की जिंदगी अचानक बदल गई थी। उस समय वह स्कूल में पढ़ते थे, तभी एक सड़क हादसे में उनके पिता की मौत हो गई। पिता के जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में भावनात्मक और आर्थिक दोनों तरह का संकट खड़ा हो गया।
पिता के निधन के बाद आयुष की मां वंदना पांडेय ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली। वह पेशे से स्कूल टीचर थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी अपने दोनों बेटों की पढ़ाई रुकने नहीं दी। उन्होंने हर मुश्किल का सामना किया, लेकिन बच्चों के सपनों के आगे हालात को कभी दीवार नहीं बनने दिया। मां की यही मेहनत और त्याग आगे चलकर आयुष की सबसे बड़ी ताकत बन गया। आयुष अक्सर पढ़ाई के दौरान कठिन परिस्थितियों से गुजरते रहे, लेकिन मां का संघर्ष उन्हें हर बार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा।
आयुष ने अपनी शुरुआती पढ़ाई प्रयागराज में पूरी की। पढ़ाई में हमेशा अच्छे रहे आयुष ने आगे चलकर गाजियाबाद से बीटेक की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने आरामदायक करियर चुनने के बजाय प्रशासनिक सेवा में जाने का फैसला किया। इसके लिए वह दिल्ली पहुंचे और UPPCS की तैयारी शुरू की। दिल्ली में तैयारी के दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। कभी रिजल्ट का दबाव, कभी असफलता का डर और कभी भविष्य की चिंता, लेकिन उन्होंने अपना फोकस नहीं खोया।
सिविल सेवा की तैयारी आसान नहीं मानी जाती। इसमें धैर्य, अनुशासन और लगातार मेहनत की जरूरत होती है। आयुष ने भी इसी रास्ते पर खुद को मजबूत बनाए रखा। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने UPPCS 2024 परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल कर ली। इस शानदार सफलता के साथ उनका चयन सब डिविजनल मजिस्ट्रेट यानी SDM पद पर हुआ। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं थी, बल्कि उस परिवार की जीत थी जिसने कठिन हालात के बावजूद उम्मीद नहीं छोड़ी।
आयुष के परिवार की उपलब्धियां यहीं नहीं रुकीं। उनके छोटे भाई पीयूष पांडेय भी भारतीय रेलवे में इंजीनियर के पद पर काम कर रहे हैं। दोनों बेटों की सफलता ने मां वंदना पांडेय के संघर्ष को सार्थक बना दिया। आज यह परिवार उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है जो मुश्किल हालात में अपने सपनों को टूटता हुआ महसूस करते हैं।
आयुष पांडेय की कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है। यह उस मां के त्याग की कहानी है जिसने अकेले परिवार संभाला, उस बेटे की कहानी है जिसने हालात के सामने हार नहीं मानी और उस भरोसे की कहानी है जो शिक्षा और मेहनत इंसान को देती है। उनकी सफलता यह बताती है कि जिंदगी चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, अगर इंसान लगातार मेहनत करता रहे और अपने लक्ष्य पर डटा रहे, तो एक दिन मंजिल जरूर मिलती है।
शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
– शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
– नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
– UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
– अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
– राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव
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