ईरान में मार्च 2026 से शुरू हुआ ‘जनफदा’ (Janfada) मुहिम पूरे देश में चल पड़ा है. ईरान की शिया इस्लामी व्यवस्था में शहादत (बलिदान) का कॉन्सेप्ट गहराई से जुड़ा है. जनफदा अभियान इसी परंपरा को फिर से जिंदा कर रहा है. ‘जनफदा’ का शाब्दिक अर्थ है ‘जान न्योछावर करने वाला’ या ‘life sacrifice’. इसे जानफिदा शादियां भी कहते हैं.
ईरान में ‘जनफदा शादियां’ या ‘शहादत से पहले की शादियां’ एक ऐसी परंपरा मानी जाती है जिसमें युद्ध पर जाने वाले लड़ाकों या ‘शहीद’ बनने की राह पर माने जाने वाले युवकों की जल्दबाजी में शादी कराई जाती है. फारसी समाज में इसे कई बार “अक्द-ए-शहादत” जैसे प्रतीकात्मक नामों से भी जोड़ा जाता है. इसकी जड़ें खासकर 1980 के दशक के के दौर में देखी जाती हैं, जब हजारों ईरानी युवा मोर्चे पर भेजे जा रहे थे. उस समय परिवारों और मजहबी संगठनों के बीच यह भावना मजबूत हुई कि जंग में जाने से पहले युवक का ‘घर बस जाना’ सामाजिक और रुहानी रूप से शुभ माना जाए.
यह वॉलंटियर रिक्रूटमेंट ड्राइव है, जिसमें लोग देश की रक्षा के लिए अपनी जान देने को तैयार होने का रजिस्ट्रेशन करते हैं. अभी अमेरिका और इजरायली हमले के दौरान इस मुहिम का मतलब और भी बढ़ गया है. लाखों ईरानी इस मुहिम में खुद को रजिस्टर करवा चुके हैं. इसमें सांसद, युवा, महिलाएं और बच्चे तक शामिल हैं.
इसी मुहिम का एक अनोखा रूप ‘जनफदा शादियां’ हैं. नवविवाहित जोड़े अपनी शादी के तुरंत बाद पारंपरिक रिसेप्शन की जगह तेहरान के एंगेलाब स्क्वायर या पलेस्टाइन स्क्वायर जैसी जगहों पर प्रो-गवर्नमेंट रैलियों में शामिल हो रहे हैं. दुल्हन-दूल्हा मिलिट्री वाहनों को शहीदों की तस्वीरों से सजाकर, राष्ट्रभक्ति के नारे लगाते और जनफदा रजिस्ट्रेशन में भाग लेते दिख रहे हैं. कुछ वीडियो में दुल्हन बिना हिजाब के भी नजर आईं. इन जोड़ों को ‘ज़ौज-ए-जानफिदा’ कहा जाता है.
आज तेहरान में 1000 जोड़ों की शादियां
इसी सिलसिले में ईरान की राजधानी तेहरान में सोमवार को 1000 जानफदा जोड़ों की शादी होने जा रही है. तेहरान में आज रात ‘ज़ौज-ए-जानफिदा’ यानी कि ‘बलिदान के लिए समर्पित जोड़ों’ का सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया जाएगा.
स्थानीय समयानुसार रात 8 बजे इन जोडों का कारवां इमाम हुसैन स्क्वायर से आज़ादी स्क्वायर तक निकाला जाएगा. कार्यक्रम का आयोजन ईरानी सरकारी मीडिया नेटवर्क IRIB से जुड़ी रिपोर्टों में प्रमुखता से दिखाया गया है.
सामाजिक-धार्मिक महत्व
ईरान की शिया इस्लामी व्यवस्था में शहादत की विचारधारा काफी गहरी है. 1980 के ईरान-इराक युद्ध से लेकर आज तक ‘शहीद’ को सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है. जनफदा अभियान मंद पड़ चुके इस परंपरा को फिर से जिंदा कर रहा है. सामाजिक रूप से यह युवा पीढ़ी को व्यक्तिगत खुशियों जैसे शादी को राष्ट्र की सेवा से जोड़कर प्रेरित करता है.
धार्मिक रूप से यह विचारधारा युवाओं को राष्ट्रीय पहचान से जोड़ती है और उन्हें मुल्क के लिए कुर्बानी देने को प्रेरित करती है. सरकार इसे ‘राष्ट्रीय एकता’ और ‘इस्लामी प्रतिरोध’ का प्रतीक बना रही है.
ईरान में अमेरिकी हमलों और ग्राउंड इनवेजन की आशंकाओं के बीच जनफदा अभियान शुरू हुआ है. दरअसल सरकार नवविवाहित जोड़ों की भागीदारी को दिखाकर दुनिया को ये संदेश देना चाहती है कि पश्चिम दुष्प्रचार से विपरित देश का युवा सरकार के साथ है. वहीं युवाओं के लिए यह एक नैतिक और मजहबी कर्तव्य के पूरा होने जैसा है.
यह दिखाता है कि ईरान में शादी अब सिर्फ दो लोगों का बंधन नहीं, बल्कि राष्ट्र से वादा भी बन गई है.