दिल्ली बस गैंगरेप मामला: सर्वाइवर का सवाल, 'मैं सेक्स वर्कर हूँ, क्या इसका मतलब यह है कि वे मेरा गैंगरेप करेंगे' – BBC

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(चेतावनी: इस रि‍पोर्ट के कुछ अंश आपको व‍िचल‍ित कर सकते हैं)
''मैं सेक्स वर्कर हूँ. क्या इसका मतलब यह है कि वे मेरा गैंगरेप करेंगे?''
एक मह‍िला ने दिल्ली में एक स्लीपर बस में कुछ लोगों पर सामूह‍िक बलात्‍कार करने का आरोप लगाया है. घटना के बारे में बताते हुए सबसे पहले यह मह‍िला यही सवाल करती हैं.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक़, 11-12 मई की दरमियानी रात में 12 बजकर 15 मिनट और 2 बजकर 30 मिनट के बीच हुई इस घटना के संबंध में सामूह‍िक बलात्‍कार का मुक़दमा दर्ज किया गया है और दो अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया गया है.
गिरफ़्तार किए गए अभियुक्त उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. वे दिल्ली और बिहार के बीच चलने वाली स्लीपर बस के ड्राइवर और क्लीनर हैं.
ज‍िस तरह घटना की मीडिया कवरेज हुई, उससे परेशान होकर इस मह‍िला ने अपना घर बदल लिया है.
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महिला रोते हुए बीबीसी से कहती हैं, "मीडिया के कैमरे मेरे घर तक पहुँच गए. पूरी झुग्गी को पता चल गया मेरे साथ क्या हुआ. मैं परिवार के साथ रहती हूँ. बहुत मजबूरी में कुछ दिन पहले ही 'सेक्स वर्क' शुरू किया था. मेरे घर पर भी लोगों को पता नहीं था. अब लोग मेरे साथ क्या हुआ इस पर बात नहीं कर रहे हैं. मैं अपना परिवार चलाने के लिए क्या कर रही थी, इसे लेकर मेरा चरित्र हनन कर रहे हैं."
यह मह‍िला कहती हैं कि भले ही पिछले कुछ दिनों से वह अपना घर चलाने के लिए 'सेक्स वर्क' कर रही थीं लेकिन उस रात वे इस काम के लिए घर से नहीं निकली थीं.
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वह बताती हैं, "मैंने अपने भाई का रूम चेंज कराया था. उसके बाद मैं घर लौट रही थी. बस स्टैंड पर यह बस रुकी और इसके कंडक्टर ने मुझे बुलाया. मैं दरवाज़े के पास खड़ी होकर बात कर रही थी. मैंने काम करने के लिए मना कर दिया. बावजूद इसके उन्होंने मुझे बस के भीतर खींच लिया."
वह कहती हैं, "उन्होंने मुझे सेक्स के बदले पैसे देने के लिए कहा लेकिन मैंने मना कर दिया था. बस में कुल पाँच लोग थे. एक आदमी सो रहा था. वे पूरी रात मुझे अपने साथ रखना चाहते थे. मैंने बार-बार मना किया, बावजूद इसके उनमें से दो लोगों ने मेरा रेप किया."
दिल्ली पुलिस ने इस घटना के संबंध में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की रेप, गैंगरेप और सामान्य आशय यानी कॉमन इंटेशन की धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया है.
डीसीपी (बाहरी दिल्ली) विक्रम सिंह ने एक बयान में घटना के बारे में बताते हुए कहा, "पुलिस को सूचना मिली थी जिसमें कॉलर ने बताया था कि उसके साथ दो लोगों ने ग़लत काम किया है, जैसे ही मामला पुलिस की जानकारी में आया, पुलिस ने घटना को गंभीरता से लेते हुए पीड़िता की सहायता की और दो अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया. पुलिस इस मामले में सख़्त कार्रवाई कर रही है."
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मह‍िला के मुताबिक़, बस से उतरते ही उन्होंने पुलिस के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया था और पाँच मिनट के भीतर ही पुलिस मौक़े पर पहुँच गई थी.
वह बताती हैं, "मौक़े पर पहुँची पुलिस ने तुरंत मेरी बात सुनी. मुझे थाने ले जाया गया और मेरी शिकायत के आधार पर तुरंत मुक़दमा दर्ज किया गया. उन्होंने मेरी हर संभव मदद करने की कोशिश की. मेरा मेडिकल कराया गया और मुझसे खाने के बारे में भी पूछा."
दिल्ली पुलिस के मुताबिक़, घटना की रिपोर्ट होने के कुछ घंटे के भीतर ही दोनों अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
मह‍िला बताती हैं, "मेरे पति पिछले कई साल से गंभीर रूप से बीमार हैं. मेरी तीन छोटी बेटियाँ हैं. मेरे घर में कमाने वाला कोई नहीं है. मैंने कुछ और काम करने की कोशिश की लेकिन कोई ऐसा काम नहीं मिला जिसमें मैं अपने परिवार का ख़र्च चलाने लायक कमा सकूँ. कुछ दिन पहले मैंने ये काम शुरू किया."
वह रोते हुए कहती हैं, "तीन बच्चियों की माँ अगर घर से निकलकर सेक्स वर्क कर रही है तो वह बहुत मजबूर ही होगी. कोई उसकी मजबूरी का फ़ायदा नहीं उठा सकता है."
एक सवाल के जवाब में वह यह भी कहती हैं कि अभियुक्तों से उनकी कोई पुरानी जान-पहचान नहीं है.
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मह‍िला के पति बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं, "मेरे घर में किसी को पता नहीं था कि मेरी पत्नी घर चलाने के लिए क्या कर रही है. उसने मुझे भी नहीं बताया था. ये सब उसने घर चलाने के लिए किया."
वह कहते हैं, "कई पत्रकार हमारे घर तक पहुँच गए. बड़े-बडे़ कैमरे लेकर बाहर वीडियो बनाने लगे. वे मेरा और मेरी पत्नी का नाम पूछ रहे थे. अब वहाँ सब हमें शक की निगाह से देख रहे हैं. क्या इन हालात में हम वहाँ रह पाएँगे?"
यह मह‍िला ज़ोर देकर कहती हैं कि वह अपने मुक़दमे को तब तक लड़ेंगी जब तक उन्हें इंसाफ़ नहीं मिल जाता.
वह कहती हैं, "ये सिर्फ़ मेरी सुरक्षा का मामला नहीं है. ये मुझ जैसी हज़ारों लड़कियों की सुरक्षा से जुड़ा है. सड़क पर खड़ी लड़की को भी सुरक्षा का उतना ही अधिकार है जितना किसी और लड़की को."
वह बताती हैं, "मेरी तीन बेटियाँ हैं. मैं उन्हें अच्छी शिक्षा देना चाहती हूँ. मैं नहीं चाहती कि मैं जिन परिस्थितियों से गुज़री, मेरी बेट‍ियों को कभी उनसे गुज़रना पड़े. जब तक मेरे मामले में सख़्त सज़ा नहीं हो जाती, मैं पीछे नहीं हटूँगी. चाहे मुझे पुलिस थाने या अदालत के कितने ही चक्कर लगाने पड़ें."
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भारत में अदालतें कई बार साफ़ कर चुकी हैं कि सेक्स वर्कर भी उतनी ही संवैधानिक गरिमा, सुरक्षा और न्याय की हक़दार हैं जितना कोई अन्य नागरिक.
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने साल 2022 में एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा था कि सेक्स वर्क 'पेशा' है और केवल किसी महिला के सेक्स वर्कर होने के आधार पर पुलिस या समाज उसके अधिकारों से इनकार नहीं कर सकता.
अदालत ने यह भी कहा था कि किसी सेक्स वर्कर की शिकायत को समान संवेदनशीलता के साथ दर्ज किया जाना चाहिए और उसकी पहचान व निजता की रक्षा की जानी चाहिए.
अदालत ने यह भी साफ़ कहा था कि "हर महिला को, चाहे उसका पेशा कुछ भी हो, यौन हिंसा और शोषण से संरक्षण पाने का अधिकार है."
भारतीय क़ानून के तहत सहमति के बिना बनाया गया कोई भी यौन संबंध बलात्‍कार माना जाता है और किसी महिला का सेक्स वर्कर होना उसकी सहमति मान लेने का आधार नहीं हो सकता.
सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने अपने फ़ैसलों में यह भी कहा है कि बलात्‍कार के मामलों में क‍िसी महि‍ला के 'चरित्र' पर सवाल उठाकर या उसके पेशे को आधार बनाकर अपराध को कमतर नहीं आँका जा सकता.
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