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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सीट शेयरिंग और कूटनीतिक शह-मात का खेल तेज हो गया है. समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सहयोगियों, खासकर कांग्रेस को एक बेहद नपा-तुला और कड़ा राजनीतिक संदेश दिया है.
अखिलेश यादव ने कहा है कि आगामी चुनावों के लिए समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने कार्यकर्ताओं और संगठन को पूरी तरह मुस्तैद कर चुकी है. उन्होंने साफ किया कि गठबंधन में जो भी दल साथ लड़ेगा, उसे सपा के मजबूत बूथ स्तर के संगठन का फायदा मिलेगा. उनका नारा है- “बात सीट की नहीं, जीत की है.”
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सियासी गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती के आवास पर उनसे मुलाकात करने की कोशिश की है.
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अखिलेश यादव ने ‘PDA’ को किसी एक दल का नहीं बल्कि एक बड़े ‘समुदाय’ और ‘आंदोलन’ के रूप में परिभाषित किया है. सपा प्रमुख ने कहा, “PDA में देश की आबादी के वो 95 फीसदी लोग शामिल हैं जो आज के दौर में पीड़ित, दुखी या अपमानित महसूस कर रहे हैं.”
उन्होंने इस आंदोलन को वर्चस्ववाद और भेदभाव के खिलाफ “नई आज़ादी का आंदोलन” करार दिया और कहा कि इसका उद्देश्य संविधान, आरक्षण की रक्षा करना और सामाजिक न्याय (समता और अवसरों की समानता) स्थापित करना है.
क्या अकेले लड़ने का है इशारा?
विश्लेषक मानते हैं सभी 403 सीटों पर कार्यकर्ताओं की मुस्तैदी की बात कहकर अखिलेश ने कांग्रेस को संदेश दिया है कि वह सपा को कमतर आंकने की भूल न करे. यदि कांग्रेस बसपा के साथ कोई अलग खिचड़ी पकाने की कोशिश करती है, तो समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने दम पर भी चुनावी मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है.
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