क्राउडफ़ंडिंग के 34 करोड़ रुपये से केरल के एक व्यक्ति की सऊदी अरब में मौत की सज़ा कैसे माफ़ हुई – BBC

इमेज स्रोत, Photo Credit : Naseer
"मेरी मां फ़ातिमा सालों से इंतज़ार कर रही हैं. लेकिन जब अब्दुल रहीम उनके सामने होंगे, तभी उन्हें यक़ीन होगा."
ये शब्द अब्दुल रहीम के भाई नसीर के हैं. अब्दुल रहीम वो शख़्स हैं जिनके लिए दुनिया भर से, खासकर केरल के लोगों ने 'ब्लड मनी' के तौर पर 34 करोड़ रुपये क्राउड सोर्सिंग ऐप के जरिए इकट्ठा किए थे.
इकट्ठी की गई इस ब्लड मनी की रकम का भारत में कोई मुकाबला नहीं है.
नसीर की यह हताशा की जड़ 20 साल पुरानी है. नसीर के परिवार को इस परेशानी का सामना तब करना पड़ा जब नवंबर 2006 में रहीम ने कोझिकोड़ में ऑटो-रिक्शा चलाना छोड़कर सऊदी अरब में ड्राइवर की नौकरी करने के लिए जाने का फैसला किया था.
रहीम को अपनी नई नौकरी शुरू किए अभी मुश्किल से 28 दिन ही बीते थे कि उन्हें 17 साल के एक लकवाग्रस्त लड़के की देखभाल करने का अतिरिक्त काम भी सौंपा गया था. लेकिन इसी बीच रहीम पर अपने मालिक के बेटे की हत्या करने का आरोप लगा.
रहीम का कहना था कि कार की पिछली सीट पर बैठे लड़के का सांस लेने वाला उपकरण ग़लती से अलग हो गया था. रहीम उन्हें रियाद के एक हाइपरमार्केट ले जा रहे थे.
रहीम के परिवार के सदस्यों और कमेटी के सदस्यों की चिंता इन दिनों इसलिए बढ़ गई है क्योंकि रहीम की आजीवन कारावास की सज़ा 20 मई को पूरी हो गई थी.
नसीर ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "गिरफ़्तारी के छह महीने बाद मेरे पिता को इस बारे में पता चला. वे बहुत परेशान हो गए और गहरे सोच-विचार में डूब गए. उन्होंने खुद को सबसे अलग कर लिया. कुछ ही महीनों के बाद उनका निधन हो गया."
समाप्त
दो साल पहले जब 'ब्लड मनी' चुका दी गई, तब से नसीर की मां उनसे यही कहती आ रही हैं कि रहीम "एक दिन घर ज़रूर लौटेगा."
वह इसी उम्मीद के सहारे जी रही हैं.
लेकिन इन सालों के दौरान विभिन्न अदालतों में कई अपीलें दायर की गईं. किंग के सामने मृत्युदंड से माफ़ी के लिए गुहार भी लगाई गई. लेकिन रहीम पर हमेशा एक ख़तरा मंडराता रहा.
इमेज स्रोत, Photo Credit : Naseer
वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
एपिसोड
समाप्त
अब्दुल रहीम लीगल असिस्टेंस कमेटी के सदस्य अशरफ़ वेंगाट ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "हमने 2011 में जब पहली बार मौत की सज़ा सुनाई गई थी, तब बच्चे के पिता से बातचीत शुरू की थी. लेकिन जून 2024 में ही मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदला गया."
हालांकि इस बीच कमेटी के सदस्यों ने रियाद स्थित भारतीय दूतावास के तत्कालीन वेलफ़ेयर ऑफ़िसर यूसुफ़ कुन्नुम्मल के साथ मिलकर, क़ानूनी लड़ाई जारी रखी.
इसके साथ ही लड़के के परिवार के सदस्यों से माफ़ी के लिए बातचीत भी शुरू की गई.
यूसुफ़ कुन्नुम्मल ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी को बताया, "अक्तूबर 2019 में ही एक वकील के ज़रिए गंभीर बातचीत शुरू हुई. अक्तूबर 2023 में हम एक आपसी समझौते पर पहुंच पाए. तभी परिवार ने 'ब्लड मनी' के तौर पर 15 मिलियन सऊदी रियाल या भारतीय करेंसी में 34 करोड़ रुपये (उस समय की मौजूदा दरों के हिसाब से) स्वीकार करने पर सहमति जताई."
इस बात को ध्यान में रखते हुए कि रहीम का परिवार इतनी बड़ी रकम जुटाने में असमर्थ था, 'अब्दुल रहीम लीगल असिस्टेंस कमेटी' को एक चैरिटेबल ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर किया गया.
नसीर ने बताया, "शुरुआती कुछ हफ़्तों में, क्राउड सोर्सिंग ऐप पर मुश्किल से दो से तीन करोड़ रुपये ही आए थे. फिर अचानक, स्थानीय चैनलों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के ज़रिए यह ख़बर फैल गई और बात दूर-दूर तक पहुंच गई. यहां तक कि मंदिरों और चर्चों ने भी मेरे भाई के लिए पैसे जुटाने की अपील की."
बिज़नेसमैन बॉबी चेम्मनूर (चेम्मनूर ज्वेलर्स) ने फ़ंड में एक करोड़ रुपये का योगदान देने के बाद फ़ंड इकट्ठा करने के लिए तिरुवनंतपुरम में एक बस चलाई.
राजनीतिक पार्टियों और मलयालम फ़िल्म जगत से जुड़ी हस्तियों ने भी इसमें अपना योगदान दिया.
समाप्त
इमेज स्रोत, Photo Credit : Naseer
अशरफ़ ने बताया कि क्राउड सोर्सिंग ऐप 1 मार्च 2024 को लॉन्च किया गया था.
उन्होंने बताया, "यह रकम बढ़कर 34 करोड़ रुपये हो गई. यह रमज़ान का 27वां दिन भी था. शायद इसी वजह से लोगों ने चंदा दिया. लेकिन जब यह लक्ष्य हासिल हो गया तो उसके बाद एक बहुत ही अजीब घटना घटी."
अशरफ़ ने बताया, "लोगों ने उस खाते में चंदा देना जारी रखा. कुल रकम बढ़कर 47 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. हमारे बैंक खाते में 13 करोड़ रुपये जमा हैं. जब रहीम वापस आ जाएंगे, तो कमेटी को यह फ़ैसला करना होगा कि इस अतिरिक्त रकम का क्या किया जाए."
कमेटी ने 'ब्लड मनी' विदेश मंत्रालय को दे दी. विदेश मंत्रालय ने इसे रियाद स्थित भारतीय दूतावास भेज दिया.
अशरफ़ ने बताया, "चेक रियाद के गवर्नर कार्यालय को सौंपा गया, जिसने इसे अदालत में जमा कर दिया. 2 जून, 2025 को अदालत ने मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदलने का फ़ैसला सुनाया."
यूसुफ़ कुन्नमल ने कहा, "यह सब वकील की मदद के बिना मुमकिन नहीं हो पाता. वह वकील उस लड़के के परिवार का रिश्तेदार भी था."
भारतीय दूतावास के इस रिटायर्ड ऑफ़िसर ने सऊदी अरब में नौ भारतीयों को मौत की सज़ा से बचाया है.
रहीम के अलावा इन नौ लोगों में पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश से एक-एक व्यक्ति और केरल से पांच अन्य लोग शामिल हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
© 2026 BBC. बाहरी साइटों की सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है. बाहरी साइटों का लिंक देने की हमारी नीति के बारे में पढ़ें.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News