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कर्नाटक की राजनीति में फिर बड़ा उलटफेर होने के संकेत हैं. हर किसी के मन में एक ही सवाल है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस्तीफा देंगे या कोई नया राजनीतिक नाटक शुरू होगा? राज्य के इस माहौल में उनकी चुप्पी ने सस्पेंस बढ़ा दिया है. रविवार को उनके करीबी मंत्रियों, विधायकों की एक अहम बैठक हुई. नेताओं ने सिद्धारमैया से साफ कहा कि वे चुप न रहें. वे अपना रुख स्पष्ट करें. इतनी हलचल के बावजूद मुख्यमंत्री ने अभी कोई खुला संकेत नहीं दिया है.
बैठक में मौजूद मंत्रियों, विधायकों ने एकजुटता दिखाने का सुझाव रखा. कुछ नेताओं ने कहा कि सभी विधायकों के हस्ताक्षर जुटाकर कांग्रेस हाईकमान को समर्थन पत्र भेजा जाए. इसमें साफ बताया जाए कि विधायक सिद्धारमैया को ही मुख्यमंत्री बनाए रखने के पक्ष में हैं. नेताओं का यह भी सुझाव था कि पार्टी के पर्यवेक्षक (ऑब्जर्बर्स) या हाईकमान के नेता बेंगलुरु आएं, तब मंत्री, विधायक खुलकर सिद्धारमैया के समर्थन में अपनी बात रखें.
समर्थन पत्र का सुझाव, लेकिन सिद्धारमैया ने नहीं जताई सहमति
सूत्रों के मुताबिक, अपने करीबियों के इस प्लान पर सिद्धारमैया का रुख काफी चौंकाने वाला रहा. उन्होंने विधायकों के दस्तखत कराकर हाईकमान को चिट्ठी भेजने के प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया. मंत्रियों, विधायकों ने उन पर अपनी चुप्पी तोड़ने के लिए बार-बार दबाव बनाया. इसके बावजूद सिद्धारमैया पूरी बैठक के दौरान शांत ही बैठे रहे. उन्होंने नेताओं की मांग पर कोई वादा नहीं किया. बैठक के आखिर में उन्होंने बस इतना कहा, ‘आप लोगों की मांगों पर मैं अपनी राय कल बताऊंगा’.
इस बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रमों पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वे इस संकट की घड़ी में साफ स्टैंड लें. कर्नाटक कांग्रेस के भीतर इस समय लीडरशिप में बदलाव को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है. सिद्धारमैया की यह चुप्पी इशारा कर रही है कि वे कोई बड़ा कदम उठाने से पहले सोच-विचार कर रहे हैं. वे दिल्ली कमान के अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं. अब सबकी नजरें कल होने वाले उनके अगले फैसले पर टिकी हैं.
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