काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग ने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने और हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक सफर और वर्तमान चुनौतियों पर गहन चर्चा की गई।
संगोष्ठी के पहले सत्र का उद्घाटन एक अखबार के संपादक संजय मिश्र ने मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया। पत्रकारिता एवं जन संप्रेषण विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर ज्ञान प्रकाश मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता के 200 वर्षों की यात्रा अद्भुत और रोमांचक रही है।
उन्होंने समसामयिक हिंदी पत्रकारिता के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर प्रकाश डाला और इसके ऐतिहासिक, वैचारिक तथा समकालीन आयामों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया। प्रोफेसर मिश्र ने यह भी बताया कि भारत की आधी से अधिक आबादी हिंदी पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन करती है और देश के भविष्य निर्माण में हिंदी पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार संजय मिश्र ने हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की यात्रा के अवलोकन को आवश्यक बताया। उन्होंने इसे राष्ट्र एवं चरित्र निर्माण का प्रमुख आधार रेखांकित किया। मिश्र ने बताया कि हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत 30 मई 1826 को कलकत्ता से प्रकाशित पहले हिंदी समाचार-पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ के साथ हुई थी, जिसके संपादक पंडित युगल किशोर शुक्ल थे। उन्होंने हिंदी भाषा में बढ़ते अंग्रेजी शब्दों के प्रयोग पर चिंता व्यक्त की और शुद्ध हिंदी शब्दावली के गहन अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि पत्रकारिता के माध्यम से आम जनता तक शुद्ध हिंदी पहुंच सके।
संगोष्ठी के द्वितीय सत्र की शुरुआत ‘हिंदी पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियां’ विषय पर एक भाषण प्रतियोगिता के साथ हुई। इस प्रतियोगिता में सुश्री चांदनी शर्मा को प्रथम पुरस्कार, अखिलेश सिंह को द्वितीय पुरस्कार, और आर्यन कुमार तथा विवेक सिंह को संयुक्त रूप से तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। सांत्वना पुरस्कार सुश्री गीतांजलि और श्री सम्यक यादव को दिया गया।
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