मंगलवार का दिन शेयर बाजार के लिए मंगल रहा. दरअसल, 2 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआती गिरावट और भारी उतार-चढ़ाव से उबरते हुए शानदार वापसी की और आखिरकार बढ़त के साथ बंद हुआ.
कारोबार के दौरान सेंसेक्स लुढ़क कर 73,815.12 अंक तक पहुंच गया था, जबकि निफ्टी 23,300 के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर को तोड़कर नीचे चला गया था. लेकिन दोपहर के बाद लोअर लेवल पर तगड़ी खरीदारी देखने को मिली.
इस रिकवरी के दम पर BSE सेंसेक्स करीब 382 अंक चढ़कर 74,649.84 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, NSE निफ्टी 50 भी निचले स्तरों से सुधरकर हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहा, निफ्टी करीब 100 चढ़कर 23,483 पर बंद हुआ. बाजार में आई इस रिकवरी और तेजी के पीछे 3 मुख्य कारण रहे.
1. IT सेक्टर में जोरदार शॉर्ट कवरिंग
इस तेजी में सबसे अहम रोल आईटी स्टॉक का रहा. पिछले कई सत्रों से दबाव झेल रहे आईटी शेयरों में जोरदार तेजी रही, अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बुनियादी ढांचे पर करीब 800 बिलियन डॉलर के भारी खर्च और ग्लोबल टेक सेंटीमेंट में सुधार के चलते निवेशकों ने आईटी शेयरों को हाथो-हाथ लिया.
निफ्टी आईटी इंडेक्स 4% से ज्यादा उछला. देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों जैसे TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) में 6.69% और इंफोसिस में 5.61 फीसदी की तेजी रही. आईटी स्टॉक्स ने अकेले निफ्टी और सेंसेक्स को रिकवर करने में सबसे बड़ा योगदान दिया. HCL टेक और विप्रो में भी शॉर्ट कवरिंग के कारण मजबूत खरीदारी देखी गई.
2. वैश्विक बाजारों से अच्छे संकेत
मंगलवार की सुबह मिडिल ईस्ट (खासकर अमेरिका-इरान वार्ता में आ रही रुकावटों) के चलते घरेलू बाजार सहमे हुए थे, लेकिन सोमवार रात को अमेरिकी बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने भारतीय बाजार को बल दिया.
इस बीच अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर यह संकेत दिए जाने के बाद कि इरान के साथ बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है, अमेरिकी बाजार (S&P 500 और नैस्डैक) रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए थे.
दोपहर बाद भारतीय ट्रेडर्स ने भी इस बात को समझा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में AI और आईटी खर्च का मोमेंटम मजबूत है, जिससे भारतीय बाजार में निचले स्तरों से ‘टेक्निकल बाउंस बैक’ आ गया.
3. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में कोई भी गिरावट भारतीय मैक्रो-इकोनॉमिक्स और कॉर्पोरेट मार्जिन के लिए सकारात्मक मानी जाती है.
भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड करीब 0.66% गिरकर 94.35 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI) 91.45 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया. तेल की कीमतों में इस मामूली राहत ने ऑटो, पेंट्स और अन्य इनपुट-कॉस्ट सेंसिटिव सेक्टर्स में निचले स्तरों पर बिकवाली को रोक दिया, जिससे बाजार को संभलने में मदद मिली.
आईटी स्टॉक्स के अलावा और टेक्सटाइल से जुड़ी कंपनियों के शेयर्स में तेजी देखने मिली. बैंकिंग शेयरों में दबाव रहा. टाटा एलेक्सी में 5%, कोफोर्ज में 3.87 फीसदी और टाटा टेक्नोलॉजी में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी की रही.
(नोट: शेयर बाजार में निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें)
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