समता, सहअस्तित्व ही भारतीय संस्कृति की पहचान : कमलेश – Dainik Bhaskar

राहतगढ़ | ग्राम मुरली बासौदा में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पांचवें दिन कथा व्यास पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को समता, सहिष्णुता और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अहंकार और अपने मत को सर्वोच्च मानने की प्रवृत्ति मनुष्य की
पं. शास्त्री ने कहा कि सनातन संस्कृति प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आस्था और साधना का मार्ग चुनने की स्वतंत्रता प्रदान करती है। धर्म का उद्देश्य किसी पर विचार थोपना नहीं, बल्कि मानव कल्याण और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है।
समाज में समता और बंधु भाव का भाव ही विविधता को शक्ति प्रदान करता है। भारत की संस्कृति सदैव विश्व मानवता के कल्याण और सभी मत-पंथों के सम्मान की पक्षधर रही है। कथा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से एकता, समन्वय और परस्पर सम्मान को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यही सच्चा धर्म, हिन्दुत्व का सार और विश्व शांति का मार्ग है।इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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