विधानसभा अध्यक्ष ने कहा-हिंदी राष्ट्रभाषा अवश्य बनेगी, इसे कोई रोक नहीं सकता – Dainik Bhaskar

हिंदी देश की राष्ट्रभाषा अवश्य बनेगी। इसे कोई रोक नहीं सकता। ये बातें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में आयोजित राज्यस्तरीय सम्मेलन और संगोष्ठी में कहीं। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति (बिहार) द्वारा न
यह आदेश हाईकोर्ट में हिंदी के प्रयोग को सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र और स्वतंत्रता आंदोलन में अधिवक्ता समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। देशर| डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जैसे महापुरुष भी अधिवक्ता ही थे। न्याय व्यवस्था में अधिवक्ता समाज एक अभिन्न अंग है, इसलिए उनका कल्याण आवश्यक है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने सत्यप्रकाश तिवारी की पुस्तक मोमबत्ती से मशाल तक का लोकार्पण भी किया। साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि राजभवन ने वर्ष 1972 में जो अधिसूचना निर्गत की थी, उसके अनुपालन के संबंध में हाईकोर्ट को न्यायिक आदेश देने में 47 वर्ष लग गए। इसके बाद भी उसका सम्यक अनुपालन न होना चिंता का विषय है। इसका शीघ्र अनुपालन होना चाहिए। ऐसे सभी प्रश्नों का एकमात्र समाधान यही है कि भारत अपनी राष्ट्रभाषा घोषित करे, जो हिंदी हो और उसकी लिपि देवनागरी हो।
न्यायपालिका में हिंदी के प्रयोग पर राज्यस्तरीय सम्मेलन और संगोष्ठी
जनता की भाषा में न्याय की व्यवस्था हो : धर्मनाथ यादव
समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मनाथ प्रसाद यादव ने कहा कि जबतक जनता की भाषा में न्याय की व्यवस्था नहीं होती, भारत के लोगों को उचित न्याय नहीं मिल सकता। आज समाज का विश्वास केवल न्यायपालिका पर बचा रह गया है। यदि न्यायपालिका से भी आमजन का विश्वास टूट गया तो देश में घोर अराजकता आ जाएगी। हमें हिंदी को इतना बल देना है कि वह शीघ्र ही भारत की राष्ट्रभाषा बने। न्यायपालिका की भाषा तो अविलंव बने। मौके पर अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद, रवींद्र राय, सत्य प्रकाश तिवारी, रणविजय सिंह, डॉ. मधु सूदन राय, पंकज कुमार, डॉ. अमित पासवान, आशुतोष कुमार, शिवानंद गिरि, संजीव मिश्र ने विचार रखे।
50 वर्षों से वकालत कर रहे अधिवक्ता किए गए सम्मानित
इस अवसर पर समिति द्वारा 50 वर्षों से अधिक समय से वकालत करने वाले अधिवक्ताओं सर्वेश नारायण सिंह, विंध्य केशरी कुमार, डॉ. उमाशंकर प्रसाद, उपेंद्र प्रसाद, नवल किशोर प्रसाद सिंह, गोपाल कृष्ण अग्रवाल, गजेंद्र प्रसाद सिंह, आशुतोष कुमार, राम प्रवेश, ब्रज किशोर प्रसाद, राम विनय शर्मा, सुरेश प्रसाद निराला, रामचंद्र सिंह, नित्यानंद तिवारी, लक्ष्मी नारायण राय, परशुराम चौधरी, राम कृष्ण गिरि, नागेंद्र प्रसाद सिंह आैर धर्मनाथ प्रसाद यादव को अधिवक्ता र| सम्मान से विभूषित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ओम प्रकाश जमुआर आैर मंच संचालन पृथ्वीराज यदुवंशी ने किया।
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