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पाकिस्तान-ऑक्यूपाइड कश्मीर (पीओके) में बुधवार को भी तनाव बना रहा, 1.5 लाख से अधिक लोगों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों में भाग लिया. जैसे-जैसे आंदोलन ने जोर पकड़ा, पाकिस्तानी अधिकारियों ने राजद्रोह के आरोप लगाकर चार प्रदर्शनकारी नेताओं पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया.
संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन इस्लामाबाद और पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के खिलाफ बढ़ते आक्रोश के बीच जारी रहे. 8 जून को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के बाद आंदोलन और तेज हो गया, जिससे पूरे पीओके में भारी आक्रोश फैल गया.
JAAC एक नागरिक संगठन है, जिसे पाकिस्तानी सरकार ने पिछले हफ़्ते बैन कर दिया था. यह संगठन पीओके पर पाकिस्तान के शासन का विरोध कर रहा है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सरकार उनकी आवाज को दबा रही है और उनके अधिकारों, अच्छे शासन व बुनियादी जरूरतों की लगातार अनदेखी कर रही है.
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यह पूरा विवाद 5 जून को बढ़ा था. बिजली और गेहूं की बढ़ती कीमतों से के चलते लोगों में विरोध देखा गया, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कड़ी कार्रवाई के बाद विरोध प्रदर्शन क्षेत्रीय अधिकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान के साथ एक भयंकर टकराव में बदल गया.
कई इलाकों में प्रदर्शन
आयोजकों के अनुसार, रावलकोट, बाग, हटियान बाला, कोटली, मीरपुर, सुधनोती, धीरकोट, डड्याल और मुजफ्फरबाद में प्रदर्शन जारी हैं. बैनर और लकड़ी के डंडे लिए भारी भीड़ ने अधिक अधिकारों की मांग करते हुए नारे लगाए हैं.
हाथों में बैनर और डंडे लिए कई लोग अपने अधिकारों के लिए नारे लगा रहे हैं. बताया जा रहा है कि अलग-अलग इलाक़ों से प्रदर्शनकारियों के बड़े-बड़े जत्थे पहले रावलकोट में इकट्ठा होंगे और फिर वहां से एक साथ मुज़फ़्फ़राबाद की ओर जाएंगे. प्रदर्शनकारी अधिकारियों पर 38 मांगों के एक चार्टर को स्वीकार करने के लिए दबाव डालने की योजना बना रहे हैं.
प्रदर्शन रोकने के लिए पाकिस्तान सरकार के कड़े कदम
बातचीत से रास्ता निकालने के बजाय, पाकिस्तान सरकार ने प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए सख़्त तरीके अपनाए हैं.
नेताओं पर इनाम और केस: आंदोलन के 4 मुख्य नेताओं पर 10 मिलियन पाकिस्तानी रुपये का इनाम रखा गया है और उन पर राजद्रोह का केस दर्ज किया गया है.
भारतीय एजेंट का आरोप: पाकिस्तानी अफसरों ने आंदोलन के बड़े नेताओं को भारतीय एजेंट बताया है. पाकिस्तान में जब भी कोई सरकार या सेना के ख़िलाफ आवाज उठाता है, तो वहां की सरकार अक्सर उस पर यही आरोप लगाती है.
रास्ते बंद किए: प्रदर्शनकारियों को मुज़फ़्फ़राबाद पहुंचने से रोकने के लिए मुख्य सड़कों को ब्लॉक कर दिया गया है. लोगों का कहना है कि हाईवे और रास्तों पर पेड़ काटकर डाल दिए गए हैं ताकि काफ़िले आगे न बढ़ सकें.
हजारों प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए, प्रदर्शनकारी सरदार अमन खान ने कहा कि अस्पतालों, रोटी, नौकरियों और बुनियादी अधिकारों की मांग करने वाली निहत्थी आबादी को पाकिस्तानी सेना और इस्लामाबाद शासन द्वारा आतंकवादी करार दिया जा रहा है.
उन्होंने कहा, बलूचिस्तान के लोगों से पूछिए कि आतंकवादी कौन हैं. वे सेना की ओर इशारा करेंगे. खैबर पख्तूनख्वा के लोगों से पूछिए. वे भी यही कहेंगे. सिंध और पंजाब से पूछिए, और आज तो पीओके के लोग भी खुलकर कह रहे हैं, असली आतंक तो वर्दीधारियों से आता है. ये जो आतंक फैलाते हैं, इसके पीछे वर्दी वाले हैं.
भारत ने पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा कश्मीरियों की हत्याओं की कड़ी निंदा की है. भारत ने यह भी उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस हिंसा के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराएगा.
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