मिडिल ईस्ट में जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। युद्ध के 103वें दिन हालात ऐसे बन गए हैं कि संघर्ष विराम की उम्मीदें कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों, तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा दिया है। इसका असर भारत पर भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोल-डीजल, गैस, खाद और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है। खरीफ सीजन के बीच DAP और यूरिया जैसी उर्वरकों की उपलब्धता और लागत भी बड़ा मुद्दा बन सकती है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। युद्ध के 103वें दिन हालात ऐसे बन गए हैं कि संघर्ष विराम की उम्मीदें कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों, तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा दिया है। इसका असर भारत पर भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोल-डीजल, गैस, खाद और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है। खरीफ सीजन के बीच DAP और यूरिया जैसी उर्वरकों की उपलब्धता और लागत भी बड़ा मुद्दा बन सकती है।
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