दिल्ली में हुई गांधी और बनर्जी परिवार की मुलाकातों ने राजनीतिक गलियारों में विलय की चर्चाओं को हवा दे दी है। अब सूत्रों के हवाले से कहा जा जा रहा है कि अगर TMC का कांग्रेस में विलय होता है तो ममता बनर्जी और भतीजे अभिषेक को राष्ट्रीय स्तर के पद दिए जा सकते हैं। इससे पहले दोनों ही दलों के नेता विलय की चर्चाओं को खारिज करते हुए नजर आ रहे थे। वहीं, TMC नेतृत्व ने भी इसपर चुप्पी साध रखी है।
एबीपी न्यूज की रिपोर्ट में कांग्रेस सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि ममता और अभिषेक को राष्ट्रीय स्तर के पदों की पेशकश की गई है। मातृभूमि की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ने ममता को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अभिषेक को कांग्रेस महासचिव पद की पेशकश की है। फिलहाल, इसे लेकर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।
सवाल यह भी है कि विलय कैसे होगा, क्योंकि TMC विधायक और सांसद स्तर पर दो गुटों में बंटती नजर आ रही है। एक ओर जहां निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी दावा कर रहे हैं कि बागी हो चुके सदस्यों की संख्या 64 पर पहुंच चुकी है। वहीं, करीब 19 सांसद काकोकी घोष दस्तीदार की अगुवाई में अलग होने की योजना बना रहे हैं। कहा यह भी जा रहा है कि टीएमसी के बागी गुट जल्द ही ECI यानी भारत निर्वाचन आयोग का रुख कर सकते हैं और नाम और चिह्न की मांग कर सकते हैं।
उन्होंने विलय की अफवाहों को खारिज किया है। साथ ही कहा है कि जहां तक हमारी विधायी पार्टी की बात है, हम निश्चित रूप से कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में इन मुलाकातों को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस की तरफ से पार्टी विलय का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है। दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच विपक्ष को मजबूत करने और INDIA गठबंधन की भविष्य की रणनीति के साथ बंगाल की स्थिति पर चर्चा हुई है। खबरें है कि टीएमसी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व को भी स्वीकार कर लिया है।
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस में विलय एक अच्छी पहल हो सकती है। इससे तृणमूल कांग्रेस से विधायकों और सांसदों का पलायन रुक सकता है, पर यह प्रस्ताव टीएमसी की तरफ से आना चाहिए। हालांकि, पश्चिम बंगाल कांग्रेस का एक तबका इन संभावनाओं के खिलाफ है।
निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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