पश्चिम बंगाल की पहली भाजपा सरकार जनता और हितधारकों के सुझावों के आधार पर अपना पहला बजट तैयार करेगी। वित्त मंत्री डॉ. स्वप्न दासगुप्ता ने सिलीगुड़ी में …और पढ़ें
बंगाल के वित्त मंत्री डा. स्वप्न दासगुप्ता।
जनता और हितधारकों के सुझावों पर आधारित होगा बजट।
उत्तर बंगाल को मिलेगी विशेष प्राथमिकता, विकास पर जोर।
जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल और कर छूट की मांग उठी।
जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी। बंगाल की पहली भाजपा सरकार अपना पहला बजट जनता और विभिन्न हितधारकों के सुझावों के आधार पर तैयार करेगी। वित्त मंत्री डॉ. स्वप्न दासगुप्ता ने गुरुवार को सिलीगुड़ी स्थित राज्य शाखा सचिवालय उत्तरकन्या में आयोजित बजट-पूर्व परामर्श बैठक के बाद यह घोषणा करते हुए कहा कि बजट निर्माण की प्रक्रिया को सरकार गंभीरता से ले रही है और प्राथमिकताएं तय करने से पहले सभी वर्गों की राय ली जा रही है।
उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब वह दौर खत्म हो गया है जब बजट बिना व्यापक परामर्श के तैयार किए जाते थे। उनका दावा था कि राज्य की नई सरकार विकासोन्मुख और व्यवसाय-अनुकूल वित्तीय रोडमैप तैयार कर रही है, जिसमें उत्तर बंगाल को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
बैठक में आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
डॉ. दासगुप्ता ने बताया कि बैठक में उत्तर बंगाल के सभी आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चैंबर आफ कामर्स, कान्फेडरेशन आफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआइआइ), क्रेडॉई सहित विभिन्न व्यापारिक, औद्योगिक और पेशेवर संगठनों के प्रतिनिधियों ने क्षेत्र की समस्याओं और संभावनाओं पर अपने सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल को लंबे समय तक उसकी आर्थिक क्षमता के अनुरूप महत्व नहीं मिला। सरकार इस स्थिति को बदलने और क्षेत्र को निवेश एवं विकास का नया केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल की उठी मांग
बैठक में उत्तर बंगाल में जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल स्थापित करने की मांग प्रमुखता से उठी। वर्तमान में कर संबंधी अपील और विवादों के निपटारे के लिए व्यापारियों को कोलकाता जाना पड़ता है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह मांग उचित प्रतीत होती है और सरकार इस संबंध में केंद्र सरकार के साथ चर्चा करेगी, ताकि व्यवसायियों को स्थानीय स्तर पर ही राहत मिल सके।
औद्योगिक निवेश बढ़ाने पर जोर
बैठक में उत्तर-पूर्वी राज्यों की तर्ज पर उत्तर बंगाल को भी कर छूट और विशेष वित्तीय प्रोत्साहन देने का मुद्दा उठाया गया। उद्योग जगत का मानना है कि इससे क्षेत्र में निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। डॉ. दासगुप्ता ने कहा कि यह पुरानी मांग है और सरकार इसकी व्यवहारिकता की जांच कर संबंधित अधिकारियों तथा केंद्र सरकार से विचार-विमर्श करेगी।
चाय उद्योग की चुनौतियों पर भी चर्चा
वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि उत्तर बंगाल का चाय उद्योग कई तरह की चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि डुआर्स और दार्जिलिंग क्षेत्र की समस्याएं अलग-अलग हैं। विपणन, श्रमिक कल्याण और उत्पादन लागत से जुड़े मुद्दों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले टी बोर्ड और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों से परामर्श किया जाएगा।
खोई हुई आर्थिक और औद्योगिक पहचान को पुनर्स्थापित करने को प्रतिबद्ध
डॉ. दासगुप्ता ने बताया कि 20 जून को पेश होने वाला बजट अगले आठ महीनों के लिए राज्य की विकास दिशा तय करेगा। बजट को अंतिम रूप देते समय परामर्श बैठकों में प्राप्त सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पश्चिम बंगाल की खोई हुई आर्थिक और औद्योगिक पहचान को पुनर्स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। बजट में इसी दृष्टिकोण की झलक देखने को मिलेगी। डॉ. दासगुप्ता ने आगे बताया कि कोलकाता में भी इसी तरह की बजट-पूर्व बातचीत हो चुकी है और बजट पेश करने से पहले सरकार के राज्यव्यापी संपर्क अभियान के तहत दुर्गापुर में एक और बैठक आयोजित की जाएगी।