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आज एअर इंडिया 171 क्रैश की पहली बरसी है. जांच पर नजर रखने वाले बड़े सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की जांच की फाइनल रिपोर्ट आने में अभी दो महीने और लग सकते हैं. सूत्रों ने जोर देकर कहा कि जांच सही दिशा में चल रही है और भरोसा दिलाया कि ‘कुछ भी छिपाया नहीं जाएगा’ और सभी नतीजे आखिर में सबके सामने लाए जाएंगे.
अहमदाबाद में उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एअर इंडिया का बोइंग 747-8 ड्रीमलाइनर क्रैश हो गया था. यह पिछले एक दशक में दुनिया का सबसे घातक हवाई हादसा था, जिसमें करीब 260 लोगों की मौत हो गई थी.
जांच की जानकारी रखने वाले बड़े सूत्रों ने बताया कि इसका मकसद एक पूरी और विस्तृत फाइनल रिपोर्ट तैयार करना है. नतीजों को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच, एक सूत्र ने कहा कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद जांच के सभी पहलुओं का खुलासा किया जाएगा.
‘कुछ छिपाया नहीं जाएगा…’
सूत्र ने इंडिया टुडे को बताया, “कुछ भी छिपाया नहीं जाएगा. हर जानकारी सबके सामने लाई जाएगी.”
सूत्र ने जांच से जुड़ी कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया और कहा कि कुछ अटकलों का कोई आधार नहीं है. सूत्र के मुताबिक, GE एयरोस्पेस की तरफ से कोई आपत्ति नहीं जताई गई है, जिसके इंजन जांच का एक अहम हिस्सा हैं.
जांच पर नजर रखने वाले एक और सीनियर अधिकारी ने बताया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय लगातार जांच की प्रगति की समीक्षा कर रहा है. इसके साथ ही, बड़े अधिकारियों को जांच से जुड़ी नई जानकारियों और फाइनल रिपोर्ट तैयार करने के काम के बारे में वक्त-वक्त पर जानकारी दी जा रही है. हालांकि, अधिकारी ने यह भी कहा कि मंत्रालय ने जांच से सामने आने वाली किसी भी आंतरिक जानकारी या संवेदनशील विवरण से खुद को स्पष्ट रूप से दूर रखा है.
सूत्रों ने आगे बताया कि AAIB फाइनल रिपोर्ट पब्लिक करने से पहले एक स्टेटस रिपोर्ट जारी करने पर विचार कर सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) के नियमों के तहत ऐसी अंतरिम जानकारी जारी करने के लिए जांचकर्ताओं पर कोई अंतरराष्ट्रीय बाध्यता नहीं है.
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एक और सूत्र ने जांच की रफ्तार पर असर डालने वाली वजह के तौर पर वेस्ट एशिया में चल रहे संकट की ओर इशारा किया. सूत्र ने कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष की वजह से एविएशन सेक्टर पर जो दबाव बना है, उसका असर जांच से जुड़े लोगों पर भी पड़ा है. उन्होंने यह भी कहा कि जांच करने वालों को ऐसी स्थितियों के लिए दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए जो उनके कंट्रोल से बाहर हैं.
पिछले साल जारी एक शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि टेक-ऑफ के कुछ ही देर बाद बोइंग 787 के इंजन फ्यूल कंट्रोल स्विच करीब एक साथ ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ पर चले गए, जिससे दोनों इंजनों को फ्यूल मिलना बंद हो गया.
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