प्रेसवार्ता में अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन: फर्रुखाबाद में सांस्कृतिक विरासत और साहित्यिक यात्रा की दी गई … – Dainik Bhaskar

फर्रुखाबाद शहर के पल्ला पार्क स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में वरिष्ठ साहित्यकार, पुरातत्वविद एवं शिक्षाविद डॉ. रामकृष्ण राजपूत ने कम्बोडिया और थाईलैंड की अपनी हालिया साहित्यिक एवं सांस्कृतिक यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हिंदी संगठन द्वारा आयोजित सम्मेलन की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी।
कम्बोडिया में आयोजित हुआ अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन
डॉ. रामकृष्ण राजपूत ने बताया कि कम्बोडिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी संगठन सम्मेलन उनके मुख्य आतिथ्य तथा डॉ. मंजुला दास की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सम्मेलन में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. रचना विमल ने विषय प्रवर्तन करते हुए हिंदी भाषा, भारतीय साहित्य, कला, संस्कृति और धर्म के वैश्विक प्रभाव पर विस्तार से विचार रखे।
भारतीय संस्कृति और बौद्ध परंपरा पर हुआ विमर्श
सम्मेलन में भारतीय संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय विस्तार, बौद्ध परंपरा के वैश्विक प्रचार-प्रसार तथा दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर भारतीय सांस्कृतिक प्रभाव पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कम्बोडियाई संस्कृति में भगवान विष्णु से जुड़े प्रतीकों और थाईलैंड की सांस्कृतिक विरासत के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
दो पुस्तकों का हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान डॉ. रामकृष्ण राजपूत की हाल ही में प्रकाशित दो पुस्तकों ‘मलेशिया-कम्बोडिया यात्रा’ तथा ‘इंग्लैंड की यात्रा-2000’ का विमोचन किया गया। वक्ताओं ने उनके साहित्यिक और शोध कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें बहुआयामी विद्वान बताया।
देशभर के साहित्यकारों की रही सहभागिता
सम्मेलन में दिल्ली विश्वविद्यालय से डॉ. रचना विमल, उत्तराखंड से जगमोहन आजाद, गुजरात से सुनील भटनागर तथा लखनऊ से पूर्व प्राचार्य गौरीशंकर गुप्ता सहित विभिन्न राज्यों के साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विभिन्न भाषाओं में काव्य पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं।
डॉ. राजपूत को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
सम्मेलन के दौरान डॉ. रामकृष्ण राजपूत को नेताजी सुभाष चंद्र बोस सम्मान तथा किंग नोरोडोम सिंहानुक सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके अलावा भारत और विदेश से आए कई प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
यूनेस्को धरोहर स्थलों का किया भ्रमण
प्रतिनिधिमंडल ने कम्बोडिया के विश्व प्रसिद्ध यूनेस्को धरोहर स्थलों का भी भ्रमण किया। इनमें अंकोरवाट मंदिर परिसर, नोम पेन्ह का रॉयल पैलेस, सिल्वर पैगोडा, रॉयल गार्डन, टयोल स्लैंग जेनोसाइड म्यूजियम तथा अन्य ऐतिहासिक स्थल शामिल रहे। डॉ. राजपूत ने इन स्थलों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी साझा की।
थाईलैंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भी किया अवलोकन
यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने थाईलैंड के पटाया और बैंकॉक स्थित प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया। इनमें कोरल आइलैंड, ग्रैंड पैलेस, वाट अरुण, वाट फो, गोल्डन बुद्ध मंदिर, रामा अष्टम ब्रिज तथा अन्य प्रसिद्ध स्थल शामिल रहे। इस दौरान सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों का भी अवलोकन किया गया।
यात्रा प्रबंधन की सराहना
डॉ. राजपूत ने बताया कि यात्रा के दौरान दिल्ली, कोलकाता, बैंकॉक, सिएम रीप और डॉन मुएंग सहित पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का उपयोग किया गया। उन्होंने यात्रा के सफल संचालन और समन्वय के लिए बॉर्डर वर्ल्ड ट्रेवल्स के संयोजक कुंडल जैन की सराहना की।
प्रेसवार्ता में डॉ. राजपूत ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और साहित्य को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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