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बेगूसराय में बिहार पुलिस ने आगामी आबकारी सिपाही भर्ती परीक्षा से पहले एक संगठित नकल गिरोह का खुलासा किया है. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए इस गैंग के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है. गिरोह परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए नकल कराने की तैयारी कर रहा था.
गिरफ्तार आरोपियों में बिहार मिलिट्री पुलिस (BMP) का एक जवान, एक यूट्यूबर शिक्षक और एक अन्य युवक शामिल हैं. ये लोग अभ्यर्थियों से तीन से चार लाख रुपये लेकर परीक्षा में सेटिंग कराने का काम करते थे. पुलिस की शुरुआती जांच में यह एक संगठित रैकेट के तौर पर सामने आया है.
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पुलिस के मुताबिक, 14 जून को होने वाली आबकारी सिपाही परीक्षा को लेकर यह पूरा नेटवर्क सक्रिय था. तकनीकी शाखा और बखरी थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर इस गिरोह का पर्दाफाश किया. कार्रवाई एसपी के निर्देश पर बनाई गई विशेष टीम ने की.
छापेमारी में सामने आया हाईटेक जखीरा
छापेमारी के दौरान पुलिस ने जीतपुर गांव स्थित एक घर को घेरकर तलाशी ली. यहां से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए. पुलिस भी इन उपकरणों की संख्या देखकर हैरान रह गई.
बरामद सामान में 38 वॉकी टॉकी, 8 ब्लूटूथ डिवाइस, 6 चार्जर, 2 मोबाइल फोन और मेटल डिटेक्टर शामिल हैं. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक चप्पल और विशेष डिवाइस लगी तीन जोड़ी बनियान भी बरामद हुई है.
पुलिस ने कई अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी जब्त किए हैं. इससे यह संकेत मिला है कि कुछ परीक्षार्थी भी इस गिरोह के सीधे संपर्क में थे और अपने दस्तावेज गिरवी रखकर डील कर चुके थे.
गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका और नेटवर्क
गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी राजेश रौशन परीक्षा सेटर के रूप में काम करता था. वह यूट्यूब के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने का दावा करता था. इसी आड़ में वह नकल नेटवर्क चला रहा था.
दूसरा आरोपी दुलारचंद कुमार और तीसरा आरोपी बीएमपी जवान नंदन कुमार उर्फ एनके इस नेटवर्क को तकनीकी और लॉजिस्टिक सपोर्ट देते थे. पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई परीक्षाओं को प्रभावित करने की योजना बना रहा था.
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर परीक्षा हॉल तक आंसर पहुंचाने की योजना बना रहे थे. इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए ब्लूटूथ और वॉकी टॉकी नेटवर्क तैयार किया गया था.
परीक्षा व्यवस्था पर बड़ा खतरा और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह गिरोह परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से चुनौती देने की कोशिश कर रहा था. आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर नकल का नया मॉडल तैयार किया गया था.
मुख्यालय डीएसपी निखिल कुमार ने बताया कि सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है. अन्य संभावित सदस्यों की भी तलाश जारी है.
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क किन किन जिलों तक फैला हुआ है और कितने अभ्यर्थी इसमें शामिल हैं. जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं.
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