गोबर के ढेर में छिपा रखा था कैश… राम मंदिर कर्मचारी के घर से 10 लाख रुपये बरामद, पिता ने बयां की अलग कहानी – AajTak

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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित चढ़ावे की राशि में कथित 7 करोड़ रुपये के गबन के दावे ने अब बड़ा रूप ले लिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के माध्यम से निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने की मांग की है. करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़े इस मामले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है.
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान मंदिर में चढ़ावे की राशि गिनने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं.
गोबर के ढेर और आलमारी से मिले 10 लाख रुपये नकद
बताया जा रहा है कि कुछ रकम घर की आलमारी में रखी गई थी, जबकि कुछ नकदी गोबर के ढेर में दबाकर छिपाई गई थी. बरामद धनराशि के स्रोत को लेकर फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है.
मामले में एक और कर्मचारी को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है. दोनों कर्मचारियों की जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कार्यों की थी.
18 हजार की नौकरी में डेढ़ करोड़ का खेल!
बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों को प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये वेतन मिलता था, लेकिन हाल के महीनों में उनकी संपत्तियों में असामान्य वृद्धि की चर्चा जांच एजेंसियों के रडार पर है. 
जानकारी के मुताबिक, एक कर्मचारी ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की भूमि खरीदी, जबकि दूसरे ने करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया है.
5 दिन में दूसरी बार अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र

इधर, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी पांच दिनों के भीतर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे. हालांकि उन्होंने कथित धन गबन के मामले पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी तक सीमित है.
जमीन गिरवी रखने का दिया तर्क
वहीं, आरोपी बताए जा रहे लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे का बचाव करते हुए कहा कि उनका पुत्र निर्दोष है. उन्होंने स्वीकार किया कि जांच टीम को उनके घर से 10 लाख रुपये मिले हैं, लेकिन फैजाबाद में निर्माणाधीन मकान से उनके बेटे का कोई संबंध नहीं है. उनका दावा है कि मकान निर्माण के लिए उन्होंने अपनी कृषि भूमि गिरवी रखी है.
अकूत संपत्ति देख उड़े जांच एजेंसियों के होश

सूत्रों के अनुसार जांच टीम में छह सदस्य शामिल थे, जिनमें दो पुलिसकर्मी वर्दी में तथा चार अन्य सिविल ड्रेस में थे. 
ग्रामीणों का कहना है कि तलाशी के दौरान नकदी घर की आलमारी और अन्य स्थानों से बरामद की गई. गांव में यह भी चर्चा है कि मंदिर में नौकरी मिलने के बाद लवकुश मिश्रा की आर्थिक स्थिति में तेजी से बदलाव आया था.
राम मंदिर की दान राशि से जुड़ा यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अब सभी की निगाहें संभावित SIT जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं. यदि जांच होती है तो इससे पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है.
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