युद्ध प्रभावित होर्मुज स्ट्रेट से तीन महीने से अधिक समय बाद भारतीय ध्वज वाला एलएनजी टैंकर ‘दिशा’ सुरक्षित बाहर निकलने वाला पहला जहाज बन गया है। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा प्रबंधित यह जहाज 62,370 टन द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लेकर आगे बढ़ चुका है। पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक उपेश कुमार शर्मा ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि एलएनजी पोत ‘दिशा’ होर्मुज को सफलतापूर्वक पार कर चुका है। यह 62370 टन एलएनजी के साथ भारत आ रहा है और 18 जून के आसपास गुजरात के दहेज बंदरगाह पहुंचने की संभावना है।
मंत्रालय ने बताया कि यह अमेरिका-ईरान के बीच प्रारंभिक युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले पहले वाणिज्यिक जहाजों में शामिल है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था, जिसके चलते यह रणनीतिक जलमार्ग प्रभावित है। इस कारण कई देशों में ऊर्जा संकट है।
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने कहा कि नौवहन महानिदेशालय विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, पोत परिवहन कंपनियों और अन्य हितधारकों के साथ निरंतर समन्वय बनाए हुए है। नियंत्रण कक्ष ने पिछले 96 घंटों में 12,737 कॉल्स और 28,299 से अधिक ईमेल्स का निपटारा किया है। इस दौरान नाविकों और उनके परिवारों से 406 कॉल्स तथा 784 ईमेल्स प्राप्त हुए। अब तक 3,587 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा चुका है, जिनमें पिछले 96 घंटों में 50 नाविक शामिल हैं। देशभर के बंदरगाहों पर परिचालन पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी किसी प्रकार की जाम की स्थिति नहीं है।
पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड द्वारा चार्टर्ड ‘दिशा’ कतर से माल ले जाने वाले जहाजों में शामिल था, जो संघर्ष के दौरान होर्मुज में फंस गया था। अब यह सफलतापूर्वक भारत की ओर रवाना हो गया है। उपेश कुमार शर्मा ने बताया कि अब तक 15 जहाज (10 भारतीय ध्वज वाले और 5 विदेशी ध्वज वाले) इस रणनीतिक मार्ग को सुरक्षित पार कर चुके हैं। खाड़ी क्षेत्र में करीब 18,000 भारतीय नाविक कार्यरत हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में 13 भारतीय जहाजों पर लगभग 325 नाविक तैनात हैं।
मंत्रालय ने भर्ती और नियुक्ति सेवा लाइसेंस (RPSL) कंपनियों तथा अन्य हितधारकों को संघर्ष क्षेत्रों में अत्यधिक सावधानी बरतने और सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दी है। नाविकों और उनके परिवारों के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन भी सक्रिय है। इस दौरान एक हांगकांग ध्वज वाले टैंकर ‘बोकेम मारेन्गो’ से जुड़ी घटना का जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा कि जहाज पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और किसी को कोई चोट नहीं आई है।
देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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