ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना ने नाकेबंदी का उल्लंघन करने पर कमर्शियल जहाज 'AT Settebello' के इंजन रूम पर मिसाइल दागी, जिसमें 3 भारतीय नाविकों की मौत …और पढ़ें
अमेरिका-ईरान शांति समझौता 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा।
अमेरिकी हमले में व्यापारिक जहाज पर तीन भारतीय नाविकों की मौत।
भारत ने अमेरिकी कार्रवाई का कड़ा विरोध किया, अमेरिकी दूत तलब।
डिजिटल डेस्क, तेहरान। पिछले तीन महीनों से पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध अब अपने खात्मे की ओर है। अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता हो गया है, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाइयां तुरंत और हमेशा के लिए रुक जाएंगी। यह खबर उन भारतीय नाविकों के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आई है, जो व्यापारिक जहाजों के जरिए इस तनावग्रस्त समुद्री इलाके से गुजरते हैं।
ऐसे में इस समझौते से ठीक कुछ दिन पहले ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा एक व्यापारिक जहाज पर किए गए हमले को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि पलाऊ के झंडे वाले इस जहाज़ को निशाना बनाने से पहले अमेरिकी सेना ने लगभग 60 बार मौखिक चेतावनी दी थी और कम से कम 8 बार ताकत का प्रदर्शन भी किया था। जब जहाज ने इन सभी चेतावनियों को अनसुना कर दिया, तब उस पर हमला किया गया।
अमेरिकी सेना की इस कार्रवाई में जहाज़ के इंजन रूम में ‘प्रिसिजन म्यूनिशन’ (सटीक निशाना लगाने वाले हथियार) से हमला किया गया, ताकि जहाज़ को बेकार (डिसेबल) किया जा सके। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में जहाज़ पर सवार 24 भारतीय क्रू सदस्यों में से 3 भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई।
मामले में एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बुधवार को हुए इस हमले से ठीक पहले अमेरिकी वायुसेना के विमानों ने जहाज के ऊपर से उड़ान भरी और आसमान में फ्लेयर्स (रोशनी वाले गोले) छोड़कर ताकत का प्रदर्शन किया। हमला करने से ठीक पहले जहाज को दो आखिरी चेतावनियां भी दी गई थीं।
इसके अलावा अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बयान में कहा कि हमला करने से पहले उन्होंने जहाज के क्रू (चालक दल) को इंजन रूम से बाहर निकलने के लिए 15 मिनट का समय दिया था। अमेरिकी सेना का कहना था कि हम पिछले 60 दिनों से वहां तैनात हैं, और यह साफ होना चाहिए कि अमेरिकी सेना इस नाकेबंदी (ब्लॉकेड) को सख्ती से लागू करेगी।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि जिस जहाज पर हमला हुआ, वह असल में एक शैडो फ्लीट शिप था। इस जहाज का इस्तेमाल ईरान पर लगे प्रतिबंधों को ताक पर रखकर अवैध रूप से ईरानी तेल को ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी सेना के मुताबिक, यह जहाज कई बार नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर चुका था और अमेरिकी बलों ने पिछले दो हफ्तों में इस जहाज से दर्जनों बार संपर्क करने की कोशिश की थी।
इस घटना के बाद भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। नई दिल्ली ने पिछले हफ्ते अमेरिकी दूतावास के प्रभारी (चार्ज डी’अफेयर्स) को तलब किया और ओमान तट के पास कमर्शियल जहाज़ पर हुए इस हमले का कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसमें तीन भारतीय नागरिकों की जान गई है।
इस पर जवाब देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने भारतीय समकक्ष से फोन पर बात की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, रुबियो ने कहा कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सभी कमर्शियल जहाज़ों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए।
हालांकि इस तनाव के बीच, समुद्री जहाजों पर काम करने वाले भारतीय क्रू सदस्यों के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर आई है। अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता हो गया है। इस समझौते के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में पिछले तीन महीनों से चल रहा युद्ध अब थमता नजर आ रहा है।
इस ऐतिहासिक शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस बात का एलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए किया। ट्रंप ने पोस्ट किया कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील अब पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मैं इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का आदेश देता हूं।
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