योग व्यक्तित्व विकास का आधार : प्रो.शशिकांत – Live Hindustan

आजमगढ़, संवाददाता। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग एवं भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर) नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को ‘स्वास्थ्य, प्रसन्नता और सामंजस्य के लिए योग’ विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें विद्वानों ने योग को स्वस्थ, संतुलित एवं मूल्यपरक जीवन की आधारशिला बताते हुए इसके वैज्ञानिक, दार्शनिक तथा व्यावहारिक आयामों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के योग दर्शन विभाग के प्रो. शशिकांत द्विवेदी ने कहा कि योग मनुष्य के शरीर, मन और चेतना को एकसूत्र में जोड़ने वाला विज्ञान है। आज की प्रतिस्पर्धी और भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग मानसिक संतुलन, आत्मानुशासन तथा आंतरिक शांति प्राप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. रविकांत तिवारी, राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,लखनऊ ने भारतीय ज्ञान परंपरा में योग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग भारत की ऐसी सांस्कृतिक विरासत है, जिसने विश्व को स्वास्थ्य, संतुलन और सामंजस्य का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास का आधार है। प्रो. प्रशांत राय ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास का सशक्त माध्यम है। अध्यक्षीय भाषण में कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत है, जो संपूर्ण मानवता को स्वस्थ, संतुलित एवं अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा देती है। संचालन डॉ. पंकज सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. प्रशांत राय ने किया। इस अवसर पर डॉ. वैशाली सिंह, त्रिशिका श्रीवास्तव, डॉ. मनीषा सिंह, डॉ. जयप्रकाश यादव, डॉ. निधि सिंह, डॉ. रोहित कुमार पांडेय, डॉ. शुभम राय उपस्थित रहे।
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