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प्रयागराज महाकुंभ में पधारे साधु-संतों की अपनी अलग-अलग किस्से_कहानियां हैं. तमाम बाबाओं की खुद की अलहदा पहचान हैं तो कई संन्यासियों की अपनी अलग खासियत है. कुछ इसी तरह की एक कहानी ‘रबड़ी बाबा’ की भी है. महाकुंभ में रबड़ी वाले बाबा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हैं तो वहीं सोशल मीडिया में भी छाए हुए हैं.
महाकुंभ में आए श्री महंत देवगिरी जी महाराज को ‘रबड़ी वाले बाबा’ के नाम से भी जाना जाता है. बाबा ने aajtak को बताया कि वे महाकुंभ में लगातार रबड़ी का प्रसाद वितरित करते आए हैं. इसलिए उनका नाम रबड़ी वाले बाबा पड़ गया.
देवगिरी जी महाराज ने बताया कि वे हर दिन लगभग 130 लीटर दूध की रबड़ी बनाते हैं और भक्ति में प्रसाद बांटते हैं. उन्होंने कहा कि वे भगवती महाकाली के उपासक हैं और देवी जी की कृपा से उन्हें यह सेवा करने की प्रेरणा मिली है.
देवगिरी जी महाराज ने बताया कि वे दूध और मध्यम शक्कर डालकर रबड़ी बनाते हैं. दरअसल, श्रद्धालुओं को डायबिटीज न हो, इसलिए चीनी की मात्रा कम रखते हैं. उन्होंने कहा कि उनका सिद्धांत है कि वे बैठकर रबड़ी खिलाते हैं, बांटते नहीं हैं.
देवगिरी जी महाराज गुजरात से आए हैं और उनके बोर्ड पर लिखा है- “राबड़ी ने मचा दी धूम, श्री महंत रबड़ी वाले।”
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