उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) आज अपने सांसदों की एक अहम बैठक करने जा रही है. पार्टी में एक और फूट की अटकलें तेज हो गई हैं; ऐसी खबरें हैं कि बागी सांसदों का एक गुट महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहा है.
यह इमरजेंसी मीटिंग ऐसे वक्त में हो रही है, जब एक दिन पहले ही खबर आई थी कि बागी गुट ने पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह का समर्थन होने का दावा किया है और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से संपर्क किया है, जिससे महाराष्ट्र में नया राजनीतिक तूफ़ान खड़ा हो गया है.
2022 में शिंदे की बगावत जैसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए उद्धव गुट ने अपने सभी नौ सांसदों को दिल्ली में सुबह 11 बजे बैठक के लिए बुलाया है और उन्हें व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का निर्देश देते हुए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी किया है.
– संजय राउत और अरविंद सावंत संसदीय दल की बैठक के लिए संसद भवन रवाना हुए. यह मीटिंग पुरानी संसद भवन में होगी.
– शिवसेना (UBT) के विधायकों को तोड़ने की कोशिशों के बारे में लगाई जा रही अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए, राज्यसभा सांसद संजय राउत ने विरोधियों को चुनौती दी है कि अगर वे ऐसा कर सकते हैं, तो करके दिखाएं. बालासाहेब ठाकरे की विरासत का जिक्र करते हुए, उन्होंने विरोधियों पर लोकतंत्र को कमजोर करने और दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उनकी पार्टी राजनीतिक दबाव का विरोध करती रहेगी.
सांसद अरविंद सावंत के साथ एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा, “शिंदे की शिवसेना कब से असली शिवसेना बन गई? असली शिवसेना तो यहां है. जहां ठाकरे, वहां शिवसेना.”
सांसदों को कार्रवाई की चेतावनी!
पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी है कि जो सांसद बैठक में शामिल नहीं होंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. इस अहम बैठक से यह तय होने की उम्मीद है कि क्या उद्धव ठाकरे अपनी संसदीय पार्टी पर कंट्रोल बनाए रखेंगे या उन्हें एक और नुकसानदेह विभाजन का सामना करना पड़ेगा. यह स्थिति 2022 में शिंदे के विद्रोह की वजह से महा विकास अघाड़ी सरकार के गिरने के चार साल बाद बनी है.
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इन अटकलों के बीच, सूत्रों का दावा है कि बागी सेना (UBT) सांसदों के एक समूह ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनौपचारिक रूप से मुलाकात की. उन्होंने दावा किया कि उन्हें पार्टी के नौ में से छह सांसदों का समर्थन हासिल है, जो दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा है.
यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब शिवसेना के सूत्रों ने इसे बहुत सोच-समझकर तैयार किया गया ‘ऑपरेशन टाइगर’ बताया है, जिसकी निगरानी कथित तौर पर दिल्ली में रहने के दौरान एकनाथ शिंदे ने की थी.