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दिल्ली में बैठे एक बड़े नेता के परिवार के साथ ऐसा होगा, शायद ही किसी ने सोचा होगा. लेकिन साइबर ठग अब इतने शातिर हो चुके हैं कि उनकी नजर आम लोगों के साथ-साथ बड़े नामों पर भी है.
ताजा मामला देश के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल से जुड़ा है, जिन्हें करीब 7.8 करोड़ रुपये का बड़ा झटका लगा है.
मामला सुनने में जितना हैरान करने वाला है, उतना ही डराने वाला भी है. बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल वॉट्सऐप पर हुआ. ठगों ने इतनी सफाई से प्लान बनाया कि एक अनुभवी नेता भी इसमें फंस गए.
News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ठगों ने खुद को किसी भरोसेमंद शख्स की तरह पेश किया. रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि मैसेज इस तरह भेजे गए जैसे कोई करीबी या ऑफिस से जुड़ा शख्स पैसे ट्रांसफर करने को कह रहा हो. बात इतनी भरोसेमंद लगी कि रकम ट्रांसफर कर दी गई और बाद में पता चला कि यह एक बड़ा साइबर फ्रॉड था.
करीब 7.8 करोड़ रुपये की यह ठगी एक ही बार में नहीं, बल्कि प्लान के तहत की गई. ठगों ने पहले भरोसा बनाया, फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम निकलवाई. इस तरह के केस में अक्सर ठग जल्दबाजी नहीं करते, बल्कि समय लेकर सामने वाले को विश्वास में लेते हैं.
WhatsApp के जरिए स्कैमर्स ने ऐसे की ठगी
नरेश गुजराल की कंपनी में काम करने वाले एक सीनियर अधिकारी को एक अनजान नंबर से WhatsApp मैसेज आया. उस नंबर की प्रोफाइल फोटो (DP) नरेश गुजराल की लगी हुई थी, इसलिए अधिकारी को लगा कि मैसेज उनके ही बॉस ने भेजा है.
मैसेज में अधिकारी को तुरंत एक बड़े अमाउंट को एक बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए कहा गया. शुरुआत में करीब 1.5 करोड़ रुपये RTGS के जरिए भेजने को कहा गया. RTGS एक ऐसा तरीका है जिससे बड़ी रकम तुरंत एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर हो जाती है.
WhatsApp पर नरेश गुजराल की डीपी लगा कर हुई ठगी
लेकिन असल में ये मैसेज नरेश गुजराल ने नहीं भेजा था. किसी ठग ने उनकी फोटो लगाकर खुद को उनके जैसा दिखाने की कोशिश की और WhatsApp पर उसी तरह बात की. अधिकारी को इस पर शक नहीं हुआ और उसने पैसे ट्रांसफर कर दिए.
इसके बाद अगले चार दिनों तक ठग लगातार पैसे मांगता रहा और हर बार अधिकारी ने पैसे भेज दिए. आखिर में कुल मिलाकर करीब 7.8 करोड़ रुपये उस ठग के अकाउंट में ट्रांसफर हो गए.
बैंक और सीएफओ तक गच्चा खा गए
इस बीच बैंक को इतनी बड़ी ट्रांजैक्शन देखकर शक हुआ और उन्होंने कंपनी के CFO से संपर्क किया. हालांकि CFO ने भी यह मान लिया कि निर्देश नरेश गुजराल की तरफ से ही आए हैं, इसलिए ट्रांजैक्शन जारी रहे.
मामले में मोड़ तब आया जब 16 जून को उस अधिकारी को शक हुआ. उसने नरेश गुजराल की बेटी दीक्षा से संपर्क किया और बताया कि आपके पिता पैसे ट्रांसफर करने को कह रहे हैं. यह सुनकर दीक्षा भी हैरान रह गईं, क्योंकि नरेश गुजराल ने ऐसी कोई बात नहीं कही थी.
इसके बाद परिवार को समझ आया कि यह साइबर फ्रॉड है और तुरंत पुलिस में शिकायत की गई. 16 जून को ही ई-एफआईआर दर्ज कराई गई.
दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम IFSO ने इस मामले की जांच शुरू की और जिस अकाउंट में पैसे ट्रांसफर हुए थे, उसे ट्रैक किया. हैरानी की बात यह रही कि ठगी गई रकम का बड़ा हिस्सा अभी भी उसी अकाउंट में मौजूद मिला.
आम तौर पर ऐसे मामलों में पैसे कुछ ही मिनटों में कई अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं, लेकिन इस केस में ऐसा नहीं हुआ. बताया जा रहा है कि 4 करोड़ रुपये ट्रेस कर लिए गए हैं और फ्रीज कर दिए गए हैं.
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