जयपुर-दिल्ली ओल्ड NHAI टोल पर अचानक हट गए बैरियर, वजह जानकर चौंक जाएंगे – Live Hindustan

दोपहर का वक्त था। जयपुर-दिल्ली ओल्ड हाईवे पर दौलतपुरा टोल प्लाजा की ओर बढ़ रहे वाहन चालक रोज की तरह टोल बैरियर के सामने गाड़ी की रफ्तार कम करने लगे। कुछ ड्राइवर तो पूरी तरह रुक भी गए। लेकिन इस बार न तो बैरियर नीचे था और न ही किसी कर्मचारी ने हाथ देकर रुकने का इशारा किया। कुछ सेकंड के लिए लोगों को लगा कि शायद सिस्टम खराब हो गया है, लेकिन असल में यहां एक नए दौर की शुरुआत हो चुकी थी।

राजस्थान में पहली बार बैरियर-फ्री टोल कलेक्शन सिस्टम लागू कर दिया गया है। इसकी शुरुआत शुक्रवार को जयपुर के दौलतपुरा टोल प्लाजा से हुई। अब यहां वाहनों को टोल चुकाने के लिए रुकने की जरूरत नहीं होगी। गाड़ियां सीधे गुजरेंगी और टोल अपने आप कट जाएगा।

दरअसल, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने जयपुर-दिल्ली ओल्ड हाईवे को पूरी तरह बैरियर-फ्री बनाने की योजना तैयार की है। 15 जुलाई तक इस रूट के सभी टोल प्लाजा को नए सिस्टम से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी पहली कड़ी के रूप में दौलतपुरा टोल प्लाजा को बैरियर-लेस कर दिया गया।

अब तक टोल प्लाजा पर पहुंचते ही वाहनों को अपनी रफ्तार कम करनी पड़ती थी। कई बार लंबी कतारों में मिनटों तक इंतजार भी करना पड़ता था। लेकिन नए सिस्टम में ऐसा कुछ नहीं होगा।

दौलतपुरा टोल प्लाजा पर अत्याधुनिक ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और हाई-स्पीड स्कैनर लगाए गए हैं। ये कैमरे गुजरती गाड़ी की नंबर प्लेट और फास्टैग दोनों को पढ़ सकते हैं। खास बात यह है कि सिस्टम 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरने वाले वाहनों की भी पहचान करने में सक्षम है।

यानी अब चालक को न तो ब्रेक लगाने की जरूरत होगी और न ही बैरियर खुलने का इंतजार करना पड़ेगा।

कई वाहन चालक यह सोच सकते हैं कि यदि फास्टैग में बैलेंस नहीं होगा या फास्टैग ही नहीं लगाया होगा तो शायद टोल बच जाएगा। लेकिन नए सिस्टम में ऐसा संभव नहीं है।

कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को रिकॉर्ड करेंगे और उसके आधार पर टोल की राशि निर्धारित होगी। इसके बाद वाहन मालिक के मोबाइल पर ऑनलाइन नोटिस या चालान भेजा जाएगा। नोटिस मिलने के बाद 72 घंटे के भीतर टोल राशि जमा करनी होगी।

नए नियमों के तहत यदि वाहन मालिक 72 घंटे के भीतर टोल का भुगतान नहीं करता, तो मामला केवल बकाया राशि तक सीमित नहीं रहेगा।

NHAI के अनुसार ऐसे वाहनों का रिकॉर्ड वाहन पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। इसके बाद वाहन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। वाहन मालिक न तो नया फास्टैग बनवा सकेगा, न बीमा का नवीनीकरण करा पाएगा और न ही प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) जारी हो सकेगा। यानी एक टोल की अनदेखी वाहन मालिक को कई प्रशासनिक परेशानियों में डाल सकती है।

बैरियर हटने के पहले ही दिन एक दिलचस्प स्थिति भी देखने को मिली। कई वाहन चालक पुराने सिस्टम के आदी थे। जैसे ही वे टोल प्लाजा पर पहुंचे, उन्होंने गाड़ी की रफ्तार कम कर दी या पूरी तरह रोक दी।

उन्हें लग रहा था कि शायद फास्टैग स्कैन होने के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी। इस भ्रम के कारण कुछ समय तक यातायात की सामान्य गति प्रभावित भी हुई।

इसी को देखते हुए NHAI ने भविष्य में टोल प्लाजा के मौजूदा स्ट्रक्चर को भी हटाने का फैसला किया है, ताकि दूर से ही यह स्पष्ट हो सके कि अब यहां किसी बैरियर पर रुकना नहीं है।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस साल मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम की शुरुआत की थी। इसका पहला प्रयोग गुजरात के सूरत-भरूच सेक्शन स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा पर किया गया था। अब राजस्थान भी इस हाईटेक व्यवस्था को अपनाने वाले राज्यों में शामिल हो गया है।

जयपुर से दिल्ली की ओर जाने वाले मार्ग पर हरियाणा सीमा तक तीन प्रमुख टोल प्लाजा हैं दौलतपुरा, मनोहरपुर और शाहजहांपुर। इनमें से पहला टोल प्लाजा अब पूरी तरह बैरियर-फ्री हो चुका है।

यानी आने वाले दिनों में राजस्थान के हाईवे पर सफर करने वालों को टोल पर रुकना इतिहास की बात लग सकती है। बैरियर गायब होंगे, लेकिन टोल वसूली पहले से ज्यादा सटीक और सख्त तरीके से जारी रहेगी। यही है हाईवे की नई डिजिटल कहानी।

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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