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जब लोग 60-65 साल की उम्र में आराम की जिंदगी की उम्मीद करने लगते हैं, तब 90 वर्षीय गेवल साव आज भी हर दिन कड़ी मेहनत करके अपना और अपनी पत्नी का पेट पाल रहे हैं. उनकी कहानी सिर्फ संघर्ष की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, मेहनत और हिम्मत की ऐसी मिसाल है, जिसे पढ़कर किसी की भी आंखें नम हो सकती हैं. पश्चिम बंगाल के कोलकाता में रहने वाले गेवल साव अपनी पत्नी के साथ एक साधारण जीवन जीते हैं. उम्र के इस पड़ाव पर जहां शरीर साथ छोड़ने लगता है, वहीं गेवल साव हर दिन सुबह 4 बजे उठ जाते हैं. उनकी सुबह किसी आराम या सैर से नहीं, बल्कि गोलगप्पे बनाने की तैयारी से शुरू होती है.
90 साल की उम्र में भी खुद बनाते हैं गोलगप्पे
गोलगप्पे बनाना कोई आसान काम नहीं है. आटा गूंथना, छोटी-छोटी पुड़ियां बेलना, उन्हें तलना और फिर पूरे दिन की बिक्री के लिए सामान तैयार करना काफी मेहनत भरा काम होता है. 90 साल की उम्र में यह काम किसी चुनौती से कम नहीं, लेकिन गेवल साव बिना शिकायत किए रोज यही दिनचर्या दोहराते हैं.
सबसे भावुक बात यह है कि वे अपना गोलगप्पे का ठेला खुद ही मार्केट तक लेकर जाते हैं. उम्र का असर उनके शरीर पर साफ दिखाई देता है, लेकिन जिम्मेदारियों का बोझ उन्हें रुकने नहीं देता. कोलकाता के बेलगोड़िया हाई स्कूल के पास वे हर शाम अपना ठेला लगाते हैं. शाम 5 बजे से लेकर रात 10 बजे तक वे ग्राहकों का इंतजार करते रहते हैं.
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80 वर्षों से कर रहे हैं यही काम
गेवल साव पिछले 80 वर्षों से गोलगप्पे बेच रहे हैं. सोचिए, एक इंसान जिसने अपनी पूरी जिंदगी मेहनत करते हुए गुजार दी, आज भी उसी काम के सहारे जीवन जीने को मजबूर है. समय बदला, शहर बदला, लोगों की जिंदगी बदली, लेकिन गेवल साव का संघर्ष नहीं बदला. कई बार ऐसा भी होता है कि पूरे दिन खड़े रहने और मेहनत करने के बाद उनकी कमाई 100 रुपये तक भी नहीं पहुंचती. आज के दौर में 100 रुपये से किसी एक व्यक्ति का दिनभर का खर्च निकालना भी मुश्किल है, लेकिन गेवल साव और उनकी पत्नी उसी कमाई में अपना गुजारा करने की कोशिश करते हैं.
गोलगप्पे का ठेला ही है जीवन का सहारा
उनके पास कोई पेंशन नहीं है, कोई बड़ा सहारा नहीं है और न ही आय का कोई दूसरा साधन. गोलगप्पे का यही छोटा सा ठेला उनकी जिंदगी की एकमात्र उम्मीद है. यही ठेला उनके घर का चूल्हा जलाता है और यही उनकी रोजी-रोटी का साधन है. सबसे बड़ी बात यह है कि इतनी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी भीख मांगने का रास्ता नहीं चुना. उन्होंने हमेशा मेहनत और ईमानदारी से कमाई करने को प्राथमिकता दी. शायद यही वजह है कि उनकी कहानी लाखों लोगों के दिलों को छू रही है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी
हाल ही में एक यूट्यूबर ने उनका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया. वीडियो में गेवल साव का संघर्ष देखकर हजारों लोग भावुक हो गए. कई लोगों ने कमेंट कर कहा कि इतनी उम्र में भी मेहनत करने वाले इस बुजुर्ग की मदद की जानी चाहिए. यूट्यूबर ने भी लोगों से अपील की है कि वे आगे आएं और इस बुजुर्ग दंपति की सहायता करें.
समाज के लिए छोड़ गए एक बड़ा सवाल
गेवल साव की कहानी हमें यह सिखाती है कि परिस्थिति चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मेहनत और आत्मसम्मान का दामन नहीं छोड़ना चाहिए. लेकिन साथ ही यह कहानी समाज के सामने एक सवाल भी खड़ा करती है- क्या 90 साल की उम्र में किसी बुजुर्ग को दो वक्त की रोटी के लिए इतनी मेहनत करनी चाहिए? आज जब हम अपनी छोटी-छोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं, तब गेवल साव जैसे लोग हमें हिम्मत, धैर्य और संघर्ष का असली अर्थ समझाते हैं. उनकी जिंदगी एक प्रेरणा है, लेकिन साथ ही एक ऐसी दर्द भरी हकीकत भी, जिसे देखकर दिल भर आता है.
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