20 साल पुराने मर्डर केस ने उद्धव के 6 सांसदों को भड़काया, बगावत की इनसाइड स्टोरी – Live Hindustan

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी शिवसेना (UBT) के भीतर बड़ी बगावत की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पिछले हफ्ते उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई लोकसभा सांसदों की बैठक के बाद शुरू हुई यह हलचल अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस ताजा असंतोष की जड़ें किसी नए राजनीतिक विवाद से नहीं बल्कि 20 साल पुराने एक हाई-प्रोफाइल मर्डर केस और उसके अदालती फैसले से जुड़ी हुई हैं।

खबरों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसद ओमराजे निंबालकर, संजय दीना पाटिल, नागेश पाटिल आष्टीकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय देशमुख और संजय जाधव पार्टी से नाता तोड़कर एनडीए (NDA) गठबंधन का हिस्सा और प्रतिद्वंद्वी शिवसेना यानी शिंदे गुट का समर्थन कर सकते हैं। यह बगावत उस समय खुलकर सामने आ गई जब इन छह सांसदों ने शिवसेना (UBT) के 60वें स्थापना दिवस समारोह से दूरी बना ली, जिसके बाद उद्धव ठाकरे ने बागियों पर चौतरफा हमला बोला।

इस पूरी बगावत के केंद्र में धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर के पिता और कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर की 2006 में हुई हत्या का मामला है। 3 जून 2006 को पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद अब्दुल वाहिद काजी की पुणे से मुंबई जाते समय नवी मुंबई के कलंबोली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी पवनराजे के चचेरे भाई और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री पदमसिंह पाटिल को बनाया गया था।

यह मामला पिछले दो दशकों से मराठवाड़ा और उस्मानाबाद की राजनीति पर हावी रहा है। दोनों परिवारों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी होने के साथ-साथ सहकारिता क्षेत्र को लेकर भी कारोबारी दुश्मनी थी। सीबीआई (CBI) जांच में यह भी सामने आया था कि कारगिल युद्ध के शहीदों के परिवारों के लिए जुटाए गए फंड में कथित धोखाधड़ी को अन्ना हजारे ने पवनराजे द्वारा दी गई जानकारियों के आधार पर ही उजागर किया था, जिससे पदमसिंह पाटिल नाराज थे।

शनिवार को मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने सबूतों के अभाव में पदमसिंह पाटिल सहित सभी 9 आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले से ठीक पहले शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने आरोप लगाया था कि उनकी पार्टी को तोड़ने के लिए सांसदों को कई तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं। राउत ने दावा किया था कि ओमराजे निंबालकर को उनके पिता के मर्डर केस में अनुकूल फैसले का लालच देकर शिंदे गुट (शिवसेना) में शामिल होने के लिए उकसाया जा रहा था।

बगावत की खबरों के बीच सांसद ओमराजे निंबालकर ने स्पष्ट किया कि यदि वे उद्धव गुट छोड़ रहे हैं तो यह किसी पैसे के लालच में नहीं बल्कि अपने पिता के हत्यारों के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रखने के लिए है। निंबालकर ने कहा, “मैं 20 साल पहले राजनीति में अपने पिता के हत्यारों के खिलाफ लड़ने के लिए आया था। मैंने धाराशिव में उस ताकतवर परिवार के खिलाफ एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ी है। मुझे शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे से कोई शिकायत नहीं है। मैंने लोकसभा चुनाव भी भारी मतों से जीता, लेकिन महाराष्ट्र की नई सरकार ने मुझे हर स्तर पर बाधित कर दिया है। अपने राजनीतिक अस्तित्व और लड़ाई को जिंदा रखने के लिए मुझे यह कदम उठाना पड़ रहा है।”

कोर्ट के फैसले पर हैरानी जताते हुए ओमराजे ने कहा कि यह फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा, “अगर सभी आरोपी बरी हो गए तो मेरे पिता को किसने मारा? हम इस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे।”

इस बीच, शिवसेना (UBT) के मुख्य सचेतक अनिल देसाई ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने और बैठक में शामिल न होने वाले इन बागी सांसदों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पार्टी ने सभी अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि वे समय पर जवाब नहीं देते हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि उन्होंने स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है और दलबदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) के तहत उन्हें अयोग्य ठहराने की कार्रवाई की जाएगी।

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
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हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
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