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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मध्य प्रदेश स्थित कूनो नेशनल पार्क के दो दिवसीय ऐतिहासिक प्रवास का सोमवार को समापन हो गया. दौरे के दूसरे और अंतिम दिन राष्ट्रपति ने कूनो प्रोजेक्ट की रीढ़ माने जाने वाले ‘चीता मित्रों’से सीधा संवाद किया. राष्ट्रपति ने उनसे वन-टू-वन चर्चा की. इस दौरान उन्होंने चीता संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की दिल खोलकर सराहना की.
संवाद के दौरान चीता मित्रों ने राष्ट्रपति मुर्मू को बताया कि कूनो नेशनल पार्क की सीमा से लगे सभी गांवों में चीता मित्र मुस्तैदी से तैनात हैं. वे ग्रामीणों के बीच जाकर जन-जागरूकता अभियान चला रहे हैं.
चीता मित्रों ने राष्ट्रपति को अपनी काम के बारे में बताया, ग्रामीणों को लगातार यह समझाया जा रहा है कि चीते स्वाभाविक रूप से इंसानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. यदि कोई चीता कभी आबादी क्षेत्र या खेतों की तरफ आ भी जाता है, तो ग्रामीण घबराने या उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचित करते हैं. इस आपसी तालमेल के कारण ही भारत की यह बेहद अहम पुनर्बसाहट परियोजना सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ रही है.
भारत की मिट्टी में जन्मे 32 शावक
कूनो नेशनल पार्क में चीतों की पुनर्स्थापन योजना को शुरू हुए अब साढ़े तीन वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है. नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से लाए गए चीतों के बाद अब यह प्रोजेक्ट आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है.
अधिकारियों ने राष्ट्रपति के सामने प्रोजेक्ट की सफलता का सबसे सुखद आंकड़ा रखते हुए बताया कि वर्तमान में देश में मौजूद कुल 52 चीतों में से 32 चीते ऐसे हैं, जिनका जन्म भारत की धरती पर ही हुआ है. यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि विदेशी चीतों को भारत का वातावरण पूरी तरह रास आ चुका है. इन 52 चीतों में से 49 कूनो नेशनल पार्क में हैं, जबकि 3 चीते मंदसौर के गांधी सागर अभ्यारण्य में शिफ्ट किए गए हैं.
रविवार को देखा था कमांड सेंटर और वॉटर पिट का नेटवर्क
इससे एक दिन पहले, यानी रविवार को राष्ट्रपति ने कूनो के हाईटेक ‘चीता कमांड एवं कंट्रोल सेंटर’ का अवलोकन किया था, जहां उन्होंने चीतों की सैटेलाइट ट्रैकिंग और पल-पल की निगरानी की अत्याधुनिक प्रक्रिया को समझा था. उन्होंने जंगल में हर 2 किलोमीटर पर बनाए गए ‘वॉटर पिट’ की व्यवस्था की भी तारीफ की थी, जिससे वन्यजीवों को पानी के लिए भटकना न पड़े.
चीता मित्रों से संवाद कार्यक्रम के संपन्न होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कूनो हेलीपैड पहुंचीं, जहां से वे हेलीकॉप्टर के जरिए ग्वालियर के लिए रवाना हो गईं. हेलीपैड पर मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मिनिस्टर इन वेटिंग व जिले के प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला, क्षेत्रीय सांसद शिवमंगल सिंह तोमर सहित तमाम जनप्रतिनिधियों और आला अधिकारियों ने उन्हें आदरपूर्वक विदाई दी. ग्वालियर के महाराजपुरा विमानतल पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ने वायुसेना के विशेष विमान से नई दिल्ली के लिए प्रस्थान किया.
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