दिल्ली के यमुना बाजार में बुलडोजर ऐक्शन शुरू, भारी फोर्स तैनात; पीड़ितों के पास क्या विकल्प – Live Hindustan

दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में गुरुवार सुबह से बुलडोजर ऐक्शन शुरू हो गया है। दिल्ली नगर निगम अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर रहा है। इसे देखते हुए इलाके में तोड़-फोड़ की कार्रवाई से पहले सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण ने कश्मीरी गेट इलाके के यमुना बाजार में रहने वाले लोगों को घर खाली करने का नया नोटिस जारी किया है। नोटिस में इलाके के घाट नंबर 2 से 32 के बीच रहने वाले लोगों से कहा गया है कि वे अपनी मर्जी से जगह खाली कर दें। ऐसा न करने पर तोड़-फोड़ की कार्रवाई की जाएगी।
इस इलाके में 310 मकान हैं, जिनमें करीब 1100 लोग रहते हैं। कई परिवार पहले ही अपने घरों को खाली कर यहां से जा चुके हैं। घरों के धवस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर लोगों में हड़कंप मच गया है। यहां रहने वाले लोगों का आरोप है कि पानी का कनेक्शन पहले ही काट दिया गया। उन्हें बुधवार रात तक घर खाली करने को कहा गया था।
ऐसे में कुछ लोगों ने यहां से अपना सामान हटाया दिया है, जबकि अब भी कई लोग यहां रह रहे हैं। लोगों में कार्रवाई को लेकर भय का माहौल देखने को मिला। स्थानीय निवासी गणेश ने बताया कि यहां से हटाए जाने वाले लोगों के लिए दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के अस्थायी आश्रय में रहने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि यह कहां का न्याय है। हमारे घर उजाड़कर नाइट शेल्टर में रहने को मजबूर किया जा रहा है। यमुना घाट पंडा एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि हम लोगों ने कोर्ट का रुख किया है। ऐसे में धवस्तीकरण का कोर्ट का कोई आदेश नहीं है। इसके बावजूद हमें हटाया जा रहा है।
● 13 मई को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत यमुना बाजार को खाली करने का नोटिस भेजा
● 15 मई को डीडीए ने यमुना डूब क्षेत्र में आने वाले ओ-जोन एरिया के तहत यमुना बाजार को खाली करने का नोटिस भेजा
● डीडीए ने दो जून के हाईकोर्ट के आदेश के तहत 23 जून तक घर खाली करने का नोटिस भेजा और 24 जून से कार्रवाई की बात कही।
● गुरुवार सुबह प्रशासन की तरफ से अवैध निर्माण पर कार्रवाई शुरू कर दी गई।
● डीडीए ने नोटिस में दिल्ली शहरी आश्रय विकास बोर्ड के रैन बसेरों में रहने का विकल्प दिया।
● इसमें राजा गार्डन, सुल्तानपुरी के ए ब्लॉक जेजेआर कॉलोनी के शेल्टर में रखने का विकल्प दिया है।
● इसके साथ मुनिरका के सरस्वती पार्क और गीता कॉलोनी में नाइट शेल्टर और रैन बसेरों में बाजार के लोगों को रहने का विकल्प दिया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधि पर रोक के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण को पर्यावरण के लिए खतरा माना है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यमुना बाढ़ क्षेत्र में 91 कॉलोनियों और गांव हैं। अब इन कॉलोनियों और गांवों में रहने वालों पर विस्थापन का संकट मंडरा रहा है। हालांकि, सरकार इनके पुनर्वास की बात कह रही है। दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट को बताया है कि इन कॉलोनियों व गांवों में करीब छह लाख लोग रह रहे हैं।
सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के ‘डीडी न्यूज’ से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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