क्या खामेनेई के अंतिम संस्कार में जाएंगे पीएम मोदी? ईरान ने इन देशों को भेजा न्योता, कहां होंगे दफन – Live Hindustan

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने का औपचारिक न्योता भेजा है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई की मौत हो गई थी। युद्ध के कारण उनका अंतिम संस्कार टाल दिया गया था, लेकिन अब युद्ध शांत होने के बाद ईरान 4 जुलाई से 9 जुलाई के बीच उन्हें सुपुर्दे खाक करने जा रहा है।

ईरानी दूतावास ने यह निमंत्रण भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) को सौंप दिया है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि पीएम मोदी इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे या नहीं।

पीएम मोदी का 6 से 11 जुलाई के बीच इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा प्रस्तावित है। ऐसे में तारीखों के टकराव के कारण पीएम मोदी के ईरान जाने पर सस्पेंस बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी वरिष्ठ नेता या मंत्री को भेजा जा सकता है।

ईरान ने इस मौके पर अपने मित्र और पड़ोसी देशों को विशेष तौर पर आमंत्रित किया है। भारत के अलावा जिन प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों को न्योता भेजा गया है, उनमें रूस, चीन, पाकिस्तान और कतर शामिल हैं। पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने पुष्टि की है कि एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल जनाजे में शामिल होगा।

ईरान इसे राष्ट्रीय एकता के प्रदर्शन के रूप में देख रहा है। ईरान सरकार का अनुमान है कि इन कार्यक्रमों में लगभग 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। यह कार्यक्रम तीन अलग-अलग शहरों में होगा।

तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला (प्रार्थना कक्ष) में खामेनेई के पार्थिव शरीर को आम जनता के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।

तेहरान की सड़कों पर मुख्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें लाखों लोगों के जुटने की उम्मीद है।

शिया इस्लाम के पवित्र शहर ‘क़ोम’ (Qom) में विशेष शोक समारोह और अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।

खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में स्थित पवित्र इमाम रज़ा दरगाह में पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया जाएगा।

मशहद में ही दफन क्यों? मशहद ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और यह अयातुल्ला खामेनेई का जन्मस्थान है। यहां इमाम रज़ा की पवित्र दरगाह है, जिसे शिया इस्लाम में सबसे सम्मानित स्थलों में गिना जाता है। यहीं उन्हें दफनाया जाएगा।

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