कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई से प्रतिबंध हटा, चेक करें आज 26 जून के रेट – Live Hindustan

मुख्य बातें

सरकार ने गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी की सप्लाई को संकट-पूर्व से पहले के स्तर पर बहाल कर दिया है और सभी क्षेत्रीय पाबंदियां वापस ले ली हैं। इस फैसले से देशभर के कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं को काफी राहत मिली है। फिलहाल एलपीजी सिलेंडर के दाम में आज 26 जून को कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में आज भी घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹942 और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत ₹3,113.50 है।

इंडियन ऑयल के ताजा रेट के मुताबिक 14.2 किलो का घरेलू एलपीजी सिलेंडर सबसे महंगा लेह में 1,179 रुपये का बिक रहा है, जबकि सबसे सस्ता सिलेंडर मुंबई में 941 रुपये का उपलब्ध है।लेह में घरेलू सिलेंडर 1,179 रुपये का है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हुए युद्ध के बाद एलपीजी की सप्लाई में आई रुकावट के बाद अब स्थिति में सुधार हुआ है। फिलहाल युद्ध पर विराम लगा हुआ है। इस सुधार को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अब गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी की सप्लाई युद्ध से पहले वाले सामान्य स्तर पर करेंगी।

सरकार ने बल्क एलपीजी सप्लाई पर लगे प्रतिबंधों में भी ढील दी है। कमर्शियल और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं के लिए संकट-पूर्व खपत के 50 प्रतिशत तक सप्लाई की अनुमति दे दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इससे उद्योगों को अपना परिचालन आसानी से फिर से शुरू करने में मदद मिलेगी।

संकट के दौरान, जब ईरान ने अमेरिकी-इजरायली हमलों के जवाब में होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया था, तब केंद्र ने आवश्यक वस्तु अधिनियम एस्मा के तहत पाबंदियां लगाई थीं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया था कि कुछ विशेष गैसों (सी3 और सी4) का उपयोग केवल एलपीजी बनाने में किया जाए ताकि इसकी कमी न हो।

अब जब एलपीजी सप्लाई बेहतर हो गई है तो सरकार इन गैसों को दोबारा दूसरे उद्योगों के लिए उपयोग करने की अनुमति दे रही है। हालांकि, यह पक्का किया गया है कि घरों और आवश्यक उपयोग के लिए एलपीजी उत्पादन कम नहीं होगा और स्थिर स्तर पर बना रहेगा।

एलपीजी की कमी तब शुरू हुई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बमबारी की और वहां के सर्वोच्च नेता समेत शीर्ष अधिकारियों को मार गिराया। हमले में मिनाब के एक प्राथमिक स्कूल को भी निशाना बनाया गया, जिसमें ईरानी मीडिया के अनुसार 168 बच्चों की मौत हुई।

जवाब में ईरान ने अस्थायी रूप से होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया, जो दुनिया का एक अहम शिपिंग रास्ता है। इसी रास्ते से वैश्विक तेल और एलपीजी सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

इस रुकावट से भारत में एलपीजी आयात पर संकट के बादल मंडराने लगे, जिसके चलते सरकार को घरेलू रसोई गैस सप्लाई को प्राथमिकता देनी पड़ी। उपलब्ध स्टॉक को संभालने के लिए कमर्शियल और औद्योगिक एलपीजी की सप्लाई पर रोक लगाई गई और हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम (सी3 और सी4) को केवल एलपीजी उत्पादन के लिए भेजा गया। इन पाबंदियों का असर देशभर के रेस्तरां, होटल और उद्योगों पर पड़ा और कई कारोबारों को नियमित एलपीजी सप्लाई पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

सप्लाई में आई रुकावट का असर कीमतों पर भी पड़ा। युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल आने से मार्च में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ाई गई थी। इसके बाद जून में फिर 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई, जिससे दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पहुंच गई।

कमर्शियल एलपीजी कंज्यूमर्स, खासकर होटल और रेस्तरां पर तो इससे भी भारी मार पड़ी। 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत पिछले कुछ महीनों में कई बार बढ़ी और मई में एक बार में 1,000 रुपये का इजाफा हुआ।

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में ‘लाइव हिन्दुस्तान’ की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए ‘कुछ अलग’ और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
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